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भर्ती प्रक्रिया में सुधार: राजेश्वर सिंह का अखिलेश यादव पर हमला

भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनकी सरकार में भर्तियों में पेपर लीक और रद्दीकरण की समस्या थी। उन्होंने वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया को सुरक्षित बताते हुए आंकड़े पेश किए, जो कानून-व्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। सिंह ने यह भी कहा कि योगी सरकार के तहत लाखों भर्तियां पूरी हो चुकी हैं और भविष्य में और भी भर्तियों की योजना है।
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भर्ती प्रक्रिया में सुधार: राजेश्वर सिंह का अखिलेश यादव पर हमला

भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा पर जोर


लखनऊ। भाजपा के विधायक राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सपा शासन के दौरान भर्तियों में हुई समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया सुरक्षित है। उनका कहना है कि अब पेपर माफिया का राज नहीं, बल्कि कानून का राज है। 2025 तक 16,284 पुलिस मुठभेड़ें और 266 अपराधियों का खात्मा, ये आंकड़े कानून-व्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं।


राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि समाजवादी सरकार में लगभग हर भर्ती पेपर लीक, कोर्ट केस और रद्दीकरण का शिकार हो जाती थी। उनकी सरकार में 600 भर्तियों को रद्द करने की मांग पर 700 से अधिक याचिकाएं कोर्ट में दायर की गईं। कोर्ट को CBI जांच का आदेश देना पड़ा और PSC चेयरमैन को हटाना पड़ा। अब वही लोग सरकारी नौकरियों और युवाओं के भविष्य की बात कर रहे हैं।




उन्होंने आगे कहा कि योगी सरकार के तहत अब तक 8.5 लाख से अधिक सरकारी भर्तियां पूरी हो चुकी हैं। अकेले यूपी पुलिस में 2.19 लाख युवाओं की भर्ती हुई है, जबकि UPSSSC, UPPSC और अन्य आयोगों से लाखों नियुक्तियां ऑनलाइन, मेरिट-आधारित और पारदर्शी तरीके से की गई हैं। वर्ष 2026 में 1.5 लाख और भर्तियों की योजना है, जिससे 10 वर्षों में 10 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियों का आंकड़ा पार होने की संभावना है।


आज भर्ती प्रक्रिया धीमी नहीं, बल्कि सुरक्षित है, क्योंकि अब पेपर माफिया का राज नहीं, कानून का राज है। 2025 तक 16,284 पुलिस मुठभेड़ें और 266 दुर्दांत अपराधियों का खात्मा, ये आंकड़े कानून-व्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। आज सवाल यह नहीं है कि कितना शोर मचाया जा रहा है, बल्कि यह है कि कितनी नौकरियाँ दी गईं, कितनी ईमानदारी से दी गईं और किस दौर में युवा सबसे ज़्यादा ठगा गया। आंकड़े खुद जवाब दे चुके हैं, अब शोर केवल असहज सच से बचने की कोशिश है।