भाजपा की आय 2024-25 में 6769.14 करोड़ रुपये, एडीआर की रिपोर्ट में खुलासा
एडीआर द्वारा जारी रिपोर्ट
नई दिल्ली: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राजनीतिक दलों की आय का आंकड़ा प्रस्तुत किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कुल आय 6,769.15 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छह राष्ट्रीय पार्टियों की आय का 85% हिस्सा भाजपा के पास है। भाजपा की आय में पिछले वर्ष की तुलना में 55.95% की वृद्धि हुई है और यह कांग्रेस की आय से लगभग सात गुना अधिक है। देश के प्रमुख छह राष्ट्रीय दलों, जिनमें भाजपा, कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी शामिल हैं, की कुल आय 7,960 करोड़ रुपये रही है। पिछले वर्ष की तुलना में राष्ट्रीय दलों की कुल आय में 41.35% की वृद्धि हुई है।
कांग्रेस की आय में कमी
कांग्रेस की आय 2023-24 में 1,230.73 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में घटकर 918.29 करोड़ रुपये रह गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25.39% की कमी दर्शाता है। आम आदमी पार्टी की आय में 73.20% की वृद्धि हुई है, जबकि बहुजन समाज पार्टी और सीपीआई-एम की आय में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया है।
चंदा और कूपन से आय का मुख्य स्रोत
रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों की आय का मुख्य स्रोत चंदा है। राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 85% से अधिक, यानी लगभग 6,772.53 करोड़ रुपये, लोगों और संगठनों से प्राप्त स्वैच्छिक चंदे से आया है। भाजपा ने अपनी कुल आय का लगभग 90.48% हिस्सा चंदे से जुटाया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने चंदे के अलावा कूपन बेचकर भी अच्छी कमाई की, जिससे पार्टी को लगभग 350.05 करोड़ रुपये मिले। हालांकि, बसपा ने अपनी रिपोर्ट में चंदे से कोई आय नहीं दिखाई और अपनी पूरी कमाई बैंक ब्याज और अन्य निवेशों से होने का दावा किया।
खर्च में बड़ा अंतर
पैसे खर्च करने के मामले में भी पार्टियों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। छह राष्ट्रीय दलों ने मिलकर कुल 4,710.27 करोड़ रुपये खर्च किए। भाजपा ने चुनाव प्रचार और प्रशासनिक कार्यों पर 3,335.37 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसकी कुल आय का आधा भी नहीं है। वहीं, कांग्रेस की आय 918.29 करोड़ रुपये रही, लेकिन पार्टी ने कुल 1,111.95 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, यानी कांग्रेस ने अपनी आय से लगभग 193.66 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया। सीपीआई-एम ने भी अपनी आय का लगभग 84% खर्च कर दिया। दूसरी ओर, भाजपा और बसपा ने अपनी आय का बड़ा हिस्सा भविष्य के लिए बचाकर रखा है।
रिपोर्ट जमा करने में लापरवाही
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी दलों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक जमा करनी थी। हालांकि, केवल बसपा, आप और एनपीईपी ने ही समय सीमा का पालन किया। सत्ताधारी दल भाजपा ने अपनी रिपोर्ट 56 दिन की देरी से और कांग्रेस ने 48 दिन की देरी से जमा की। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अपनी रिपोर्ट जमा करने में 18 दिनों का समय लिया।
