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भाजपा की नई सरकारों में मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठे

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल और असम में नई सरकारों का गठन किया है, लेकिन मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में केवल छह और असम में चार मंत्रियों ने शपथ ली है, जबकि दोनों राज्यों में अधिक मंत्रियों की नियुक्ति संभव है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
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भाजपा की नई सरकारों में मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठे

मुख्यमंत्रियों ने ली शपथ, लेकिन मंत्रियों की संख्या सीमित

भारतीय जनता पार्टी ने दो राज्यों में चुनाव जीतकर नई सरकारें बनाई हैं, जहां मुख्यमंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया है। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, यह देखना आश्चर्यजनक है कि दोनों राज्यों में केवल कुछ चुनिंदा मंत्रियों ने ही शपथ ली। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु के साथ केवल पांच मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें दिलीप घोष, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू, निशीथ प्रमाणिक और अग्निमित्रा पॉल शामिल हैं। जबकि राज्य में 44 मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री सहित केवल छह मंत्री बने हैं।


इसी प्रकार, असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ केवल चार मंत्रियों ने शपथ ली। भाजपा के दो नेता रामेश्वर तेली और अजंता नियोग मंत्री बने हैं, जबकि असम गण परिषद से अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट से चरण बोरा को भी शपथ दिलाई गई है। असम में 18 मंत्रियों की नियुक्ति संभव है। यह ध्यान देने योग्य है कि दोनों राज्यों में सरकारें जल्दी नहीं बनीं; बंगाल में नतीजे आने के पांच दिन बाद और असम में आठ दिन बाद सरकार का गठन हुआ। असम में भाजपा की सरकार पिछले 10 वर्षों से है, और यह तीसरी बार है जब सरकार बनी है। फिर भी, मंत्रियों की संख्या इतनी कम है। पार्टी के जानकारों का मानना है कि असम में कई मंत्रियों के चेहरे बदले जा सकते हैं, इसलिए अभी कम मंत्रियों की नियुक्ति की गई है। बंगाल में भी नए मंत्रियों की नियुक्ति में देरी हो रही है। इसी तरह, तमिलनाडु में भी 35 मंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ केवल नौ मंत्रियों ने ही शपथ ली है।