भाजपा नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस पर किया हमला
भाजपा नेताओं की प्रेस कांफ्रेंस
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। इस दौरान दोनों नेताओं ने सदन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का समर्थन न करने के लिए कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला किया।
स्मृति ईरानी ने कहा कि आज कांग्रेस की एक प्रेस वार्ता में राष्ट्र की महिलाओं को 98 साल का एक एहसान जताया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक ऐसा सपना दिखाया, जो महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने का दावा करता है। लेकिन 98 साल में इस मंशा का क्या हुआ, यह कल संसद में सभी ने देखा। कांग्रेस ने इस बात का जश्न मनाया कि उन्होंने आम महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को कुचला। भाजपा के लिए यह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं है, बल्कि समानता के अधिकार की लड़ाई है।
स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि महिलाएं याद रखेंगी कि कांग्रेस के शासन के दौरान 11 करोड़ महिलाएं शौचालयों की सुविधा से वंचित रहीं। इसके अलावा, 25 करोड़ महिलाओं को बैंक खाते खोलने में आवश्यक सहायता नहीं मिली। भाजपा-एनडीए के शासन में पहली बार 'जेंडर बजट फ्रेमवर्क' की शुरुआत की गई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस बात का जश्न मनाया कि वर्षों से संघर्ष कर रही राजनीतिक महिलाएं, जो केवल 33 प्रतिशत अधिकार मांग रही थीं, उन्हें कैसे वंचित रखा जाए। भाजपा के लिए यह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि समानता का अधिकार देने का प्रश्न है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की प्रेस वार्ता में कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा में कुछ लोग मसीहा बनने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2023 में पारित बिल का समर्थन करने की बात कही, जिसमें परिसीमन का उल्लेख है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें परिसीमन और व्यवस्था में विश्वास नहीं है। यह कांग्रेस का दोगलापन है।
रविशंकर प्रसाद ने प्रियंका गांधी पर भी तंज कसा और उनकी बातों की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब मैं प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ कुछ कह रहा हूं। उन्होंने महिलाओं को 'इस्तेमाल करने' की बात कही, क्या भारत की महिलाएं कोई वस्तु हैं? यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक महिला सांसद की भाषा है, जिसे हम नकारते हैं।
रविशंकर प्रसाद ने संविधान के बारे में बताते हुए कहा कि परिसीमन के बिना लोकसभा या विधानसभा में सीटों में कोई बदलाव संभव नहीं है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार, लोकसभा की सीटें प्रत्येक राज्य को आवंटित की जानी चाहिए। जब जनगणना होती है, तो दक्षिण भारत की जनसंख्या लगातार कम होती जा रही है। अमित शाह ने घोषणा की कि नए संशोधन के तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी, ताकि 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सके।
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस का तर्क है कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है। लेकिन दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर कम होने के कारण उनका सापेक्ष हिस्सा कम हो सकता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीएमके जानबूझकर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित कर रही है।
