भाजपा में नितिन नबीन की नई टीम का गठन जल्द, कई नामों पर चर्चा
भाजपा में बदलाव की तैयारी
पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद, अब दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है। आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कब बढ़ेंगी, जबकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि नितिन नबीन अपनी नई टीम कब बनाएंगे। ध्यान देने योग्य है कि नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने चार महीने होने वाले हैं। उनके नाम की घोषणा पिछले साल दिसंबर में हुई थी, जब उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस साल 20 जनवरी को उन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इसलिए, सामान्यतः चार महीने में उनकी टीम का गठन हो जाना चाहिए था। लेकिन चुनावों में व्यस्तता के कारण संगठन में बदलाव को स्थगित कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी में आमतौर पर बड़े बदलाव नहीं होते; नए अध्यक्ष को पूर्व अध्यक्ष की टीम विरासत में मिलती है और वह कुछ फेरबदल के साथ कार्य करता है। अमित शाह की टीम के साथ जेपी नड्डा ने काफी समय बिताया, और अब नड्डा की टीम नितिन नबीन के साथ काम करेगी।
हालांकि, उनकी टीम में कुछ नए चेहरे शामिल होने की संभावना है। जानकार सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन की टीम इसी महीने बन सकती है, यानी मई खत्म होने से पहले भाजपा के नए पदाधिकारियों की घोषणा की जा सकती है।
इस संदर्भ में कई अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन कुछ नामों पर सहमति बनती दिख रही है। जैसे कि बीएल संतोष संगठन महामंत्री बने रह सकते हैं, और सुनील बंसल भी महामंत्री की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद, सुनील बंसल को संगठन महामंत्री बनाने की चर्चा भी हुई है। यदि वे महामंत्री बने रहते हैं, तो संभव है कि उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया जाए, जहां वे पहले भी संगठन महामंत्री रह चुके हैं। मौजूदा महामंत्रियों में विनोद तावड़े के पद पर बने रहने की संभावना है, और तरुण चुघ भी महामंत्री बन सकते हैं। राम माधव को महामंत्री बनाने की चर्चा है, जिन्हें ग्रेटर बेंगलुरू नगर निगम चुनाव में जिम्मेदारी दी गई है।
नितिन नबीन की टीम में ब्राह्मण चेहरे के रूप में हरीश द्विवेदी का नाम चर्चा में है। अगले साल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ब्राह्मणों को एक सकारात्मक संदेश देना आवश्यक है। हरीश द्विवेदी की चर्चा इसी संदर्भ में की जा रही है। हालांकि, सुधांशु त्रिवेदी भी महामंत्री बन सकते हैं, लेकिन उन्हें सरकार में भेजा जा सकता है। बिहार सरकार में मंत्री बनने से चूक गए मंगल पांडेय भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन चूंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से हैं, इसलिए उन्हें महामंत्री नहीं बनाया जा सकता। वे उपाध्यक्ष बन सकते हैं। महिला चेहरे के रूप में स्मृति ईरानी को संगठन में शामिल किया जा सकता है। लोकसभा चुनाव हारने के बाद वे काफी समय तक बियाबान में भटकती रहीं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके अच्छे काम का इनाम मिल सकता है। झारखंड से अर्जुन मुंडा या रघुवर दास में से किसी को नितिन नबीन की टीम में जगह मिल सकती है, या कोई नया चेहरा आ सकता है। तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल करने की चर्चा है। यह भी बताया जा रहा है कि महिला आरक्षण का माहौल बनाने के लिए इस बार संगठन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है।
