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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राजनीतिक विवाद गहराया

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील एक बार फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समझौते फोन कॉल पर नहीं, बल्कि कूटनीति से होते हैं। मनीष तिवारी ने भी अमेरिकी वाणिज्य सचिव के बयान पर सवाल उठाए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव।
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राजनीतिक विवाद गहराया

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर नई बहस


नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लम्बे समय से रुकी हुई ट्रेड डील एक बार फिर से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का निर्माण फोन कॉल पर नहीं, बल्कि रणनीतिक समझ और कूटनीति के माध्यम से होता है। इस विवाद ने भारत और अमेरिका के संबंधों और अमेरिकी व्यापार नीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


कांग्रेस का मोदी पर सीधा हमला

कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, 'हग हग ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा।' उनका इशारा प्रधानमंत्री की पूर्व अमेरिकी यात्राओं और सार्वजनिक कूटनीति की शैली की ओर था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की व्यक्तिगत कूटनीति अब विफल हो रही है और देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।



मनीष तिवारी ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव के बयान को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की समझ से परे बताया। उन्होंने कहा कि यह धारणा कि समझौते इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन किसे फोन करता है, बेहद अपरिपक्व है। तिवारी ने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत और रणनीतिक आधार पर भी है।



भारत की रणनीतिक भूमिका पर जोर

मनीष तिवारी ने कहा कि अमेरिका को भारत की एशिया पैसिफिक और वैश्विक रणनीतिक भूमिका को समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई अमेरिकी प्रशासन इस रिश्ते की अहमियत को समझते रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे नजरअंदाज करता दिख रहा है। उनके अनुसार, भारत केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।


अमेरिकी वाणिज्य सचिव का बयान

अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में कहा कि भारत अमेरिका ट्रेड डील इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। उन्होंने बताया कि डील लगभग तय थी, लेकिन नेतृत्व स्तर पर सीधी बातचीत नहीं हो सकी। लुटनिक के अनुसार, भारत समय पर निर्णय नहीं ले सका।


टैरिफ और अधूरी बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच फरवरी से ट्रेड बातचीत चल रही थी। 2025 में कई दौर की आमने सामने बातचीत हुई, जिसमें दिसंबर में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत भी आया। समझौता न होने के कारण भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू है, जिसमें रूस से ऊर्जा खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। यह स्थिति दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर दबाव बना रही है।