भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नया मोड़: ट्रंप ने टैरिफ में की बड़ी कटौती
भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में सुधार
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में एक बार फिर सुधार देखने को मिल रहा है, जिसका प्रमाण हाल ही में हुई ट्रेड डील में स्पष्ट है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए भारत पर लगने वाले टैरिफ में महत्वपूर्ण कमी की घोषणा की है।
अजीत डोभाल का स्पष्ट संदेश
सितंबर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो के साथ एक गोपनीय बैठक की थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक पीएम मोदी की चीनी और रूसी राष्ट्रपतियों से मुलाकात के तुरंत बाद हुई। डोभाल ने रुबियो को स्पष्ट रूप से बताया कि भारत पुरानी कड़वाहट को भुलाकर व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ट्रंप प्रशासन के दबाव में आने के बजाय उनके कार्यकाल के समाप्त होने तक इंतजार करने को तैयार है। इसके साथ ही, डोभाल ने सुझाव दिया कि यदि अमेरिका रिश्तों को सुधारना चाहता है, तो उसे भारत की सार्वजनिक आलोचना को कम करना होगा।
डोभाल की पहल का सकारात्मक प्रभाव
डोभाल की स्पष्टता का सकारात्मक असर जल्द ही देखने को मिला। 16 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर उनकी प्रशंसा की। इसके बाद, साल के अंत तक दोनों नेताओं के बीच चार बार फोन पर बातचीत हुई, जिससे टैरिफ में कमी लाने की दिशा में तेजी आई। इस कूटनीतिक सक्रियता ने दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में मदद की।
भारत के साथ व्यापार समझौता
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि भारत के साथ व्यापार समझौता हो गया है। इसके तहत भारतीय सामानों पर टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी समाप्त कर दिया गया है। इसके बदले में, भारत ने 500 बिलियन डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने, वेनेजुएला से तेल का आयात करने और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ को 'जीरो' करने की प्रतिबद्धता जताई है।
यह समझौता दोनों देशों के लिए एक 'विन-विन' स्थिति माना जा रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए सरकारी दस्तावेजों का संदर्भ लेना उचित होगा।
