भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच तनाव पर चर्चा
भारत के विदेश मंत्री की ईरान के साथ बातचीत
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे कई देशों में चिंता बढ़ गई है।
बातचीत का विवरण
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने दोपहर में ईरान के विदेश मंत्री से टेलीफोन पर चर्चा की। इस बातचीत में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और बढ़ते तनाव पर चर्चा होने की संभावना है।
ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर शोक
भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु पर भी शोक व्यक्त किया है। उनकी मौत 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर शोक संदेश दर्ज किया और ईरानी राजदूत से मुलाकात की।
भारत की तनाव कम करने की अपील
भारत ने इस संकट के बीच स्पष्ट रूप से कहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा हालात में जल्द से जल्द तनाव कम होना आवश्यक है।
खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की सुरक्षा
सरकार के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं। इस स्थिति के कारण वहां की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन भारतीयों की सुरक्षा और भलाई प्राथमिकता है। हाल के हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी आई हैं।
तेल और व्यापार पर संभावित प्रभाव
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ रहा है। विशेष रूप से होर्मूज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है, अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल विदेश से खरीदता है। यदि क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ेगा।
