भारत और तालिबान के बीच बढ़ते संबंध: पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय
भारत और तालिबान के बीच नए रिश्ते
पाकिस्तान के साथ बिगड़ते संबंधों के चलते तालिबान भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। भारत भी अफगानिस्तान के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए तत्पर है। वर्तमान में, भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंध काफी मजबूत हो चुके हैं। हाल ही में, दिल्ली में अफगान दूतावास के नए प्रमुख मुफ्ती नूर अहमद नूर ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आनंद प्रकाश के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक इसलिए खास है क्योंकि अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद नूर अहमद नूर भारत में नियुक्त होने वाले पहले तालिबान अधिकारी हैं। उन्होंने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
बैठक का उद्देश्य
दूतावास के अनुसार, मुफ्ती नूर अहमद नूर और आनंद प्रकाश के बीच व्यापार को बढ़ावा देने और वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बैठक में भारत में रह रहे अफगान व्यापारियों, छात्रों और नागरिकों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। हालांकि, भारत ने तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता और रणनीतिक जुड़ाव के माध्यम से भारत ने अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन किया है।
पाकिस्तान के लिए खतरा
जहां पाकिस्तान और तालिबान के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है, वहीं भारत का तालिबान की ओर बढ़ता हाथ पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। अफगानिस्तान को यह समझ में आ गया है कि विकास और व्यापार के लिए भारत से बेहतर कोई साझेदार नहीं हो सकता। भारत भी चाहार और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए अफगानिस्तान के साथ मजबूत रिश्तों को आवश्यक मानता है। पिछले कुछ महीनों में अफगान मंत्रियों की भारत में लगातार बैठकें पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती हैं।
