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भारत का इजराइल के खिलाफ यूएन में समर्थन, मोदी की यात्रा से पहले बड़ा कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा से पहले, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के खिलाफ एक महत्वपूर्ण बयान पर हस्ताक्षर किया है। इस बयान में वेस्ट बैंक में इजराइल की कार्रवाइयों की निंदा की गई है। भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह भारत की संतुलित कूटनीति को भी उजागर करता है, जहां वह इजराइल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संबंधों को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। क्या यह मुद्दा मोदी की यात्रा के दौरान उठेगा? जानें इस लेख में।
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भारत का इजराइल के खिलाफ यूएन में समर्थन, मोदी की यात्रा से पहले बड़ा कदम

भारत का कूटनीतिक कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा से पहले, भारत ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के खिलाफ एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें वेस्ट बैंक में इजराइल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है। यह बयान 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी किया गया है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, रूस, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं। भारत ने इस बयान का समर्थन उस समय किया जब इसकी डेडलाइन समाप्त होने वाली थी। बयान में कहा गया है कि वेस्ट बैंक में इजराइल की एकतरफा कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इन्हें तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए, जिसमें 1967 के बाद कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों, पूर्वी यरूशलेम भी शामिल हैं।


संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की अंडर सेक्रेटरी जनरल रोजमरी डिकालो ने चेतावनी दी है कि यह कदम डिफेक्टो एनेक्सेशन की दिशा में बढ़ रहा है, जो व्यवहारिक रूप से कब्जे की स्थिति को मजबूत करता है। यह मुद्दा अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच चुका है। भारत का यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच पिछले एक दशक में संबंध काफी मजबूत हुए हैं, विशेषकर रक्षा और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। हालांकि, भारत हमेशा से दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है, जिसमें स्वतंत्र फिलिस्तीन और सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजराइल दोनों का सह-अस्तित्व शामिल है।


भारत की संतुलित कूटनीति

यह कदम भारत की संतुलित कूटनीति का संकेत है, जहां वह फिलिस्तीन और इजराइल दोनों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है। एक ओर, भारत इजराइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर, वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों में फिलिस्तीन का समर्थन भी कर रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान यह मुद्दा उठाया जाएगा और क्या भारत अपने पारंपरिक संतुलन को बनाए रखते हुए पश्चिमी एशिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास करेगा। यह स्पष्ट है कि भारत ने यह संदेश दिया है कि दोस्ती महत्वपूर्ण है, लेकिन वैश्विक नियम और सिद्धांत भी उतने ही आवश्यक हैं।