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भारत का वैश्विक मार्ग: एस जयशंकर का दृष्टिकोण

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद में भारत के विकास और हिंद महासागर की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत का वैश्विक मार्ग स्वयं निर्धारित है और इसका विकास उसकी आंतरिक क्षमताओं पर निर्भर करता है। जयशंकर ने अमेरिका के उप विदेश मंत्री के बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत का उत्थान केवल भारत द्वारा ही निर्धारित होगा। जानें उनके विचार और हिंद महासागर में भारत की केंद्रीय भूमिका के बारे में।
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भारत का वैश्विक मार्ग: एस जयशंकर का दृष्टिकोण

भारत का विकास और हिंद महासागर की भूमिका

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत का अंतरराष्ट्रीय मार्ग स्वयं निर्धारित है, और यह देश की प्रगति उसकी आंतरिक क्षमताओं और दृढ़ता पर निर्भर करती है। रायसीना संवाद में अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यदि हमें हिंद महासागर के संबंध में एक पहचान बनानी है, तो यह संसाधनों, कार्यों, प्रतिबद्धताओं और व्यावहारिक परियोजनाओं के माध्यम से संभव होगा। उन्होंने बताया कि हिंद महासागर के निर्माण के कई पहलू हैं। यह महासागर एकमात्र ऐसा महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है, क्योंकि हम इसके केंद्र में स्थित हैं। हमारे विकास से अन्य हिंद महासागरीय देशों को भी लाभ होगा। जो देश हमारे साथ सहयोग करेंगे, उन्हें अधिक लाभ प्राप्त होगा। भारत का विकास हमारी शक्ति से निर्धारित होगा, न कि दूसरों की गलतियों से।


जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण निवेश किया है और इसकी वृद्धि से अन्य देशों को भी लाभ होगा।


अमेरिका के बयान के संदर्भ में जयशंकर की प्रतिक्रिया

रायसीना संवाद में जयशंकर की टिप्पणियाँ अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ के उस बयान के दो दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत को वही आर्थिक लाभ नहीं देगा जो उसने चीन को दिए थे, जिससे बीजिंग एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन गया। जयशंकर ने संवाद सत्र में कहा कि जब हम देशों के विकास की बात करते हैं, तो यह विकास उन देशों द्वारा ही निर्धारित होता है। भारत का विकास भी भारत द्वारा ही निर्धारित होगा। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि यह हमारी ताकत से तय होगा, न कि दूसरों की गलतियों से।


जयशंकर ने हिंद महासागर में भारत की केंद्रीय भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो देश हमारे साथ काम करेंगे, उन्हें निश्चित रूप से अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के विकास में चुनौतियाँ हैं, लेकिन विकास की दिशा स्पष्ट है और यह रुकने वाला नहीं है।