भारत की अक्षय ऊर्जा में नई उपलब्धियां: वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान
भारत की अक्षय ऊर्जा में महत्वपूर्ण प्रगति
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वैश्विक चर्चा के बीच, भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को जानकारी दी कि भारत अब विश्व स्तर पर अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2025 के अंत तक ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है। यह रिपोर्ट 'रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026' के तहत प्रकाशित हुई है। यह उपलब्धि भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले ही पूरा करना शुरू कर दिया है।
भारत की स्थिति: चीन और अमेरिका से पीछे
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में सबसे अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता चीन के पास है, जिसकी क्षमता 2,258.02 गीगावाट है। अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत इस सूची में 250.52 गीगावाट के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद ब्राजील (228.20 गीगावाट) और जर्मनी (199.92 गीगावाट) का स्थान है। मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने अकेले 55.3 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो दर्शाता है कि सरकार ने हरित ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया है। विशेष रूप से, भारत ने जून 2025 में अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर लिया था, जो पेरिस समझौते के लक्ष्य से पांच साल पहले की उपलब्धि है।
बिजली उत्पादन में अक्षय ऊर्जा का बढ़ता योगदान
जुलाई 2025 का महीना भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। इस दौरान देश की कुल बिजली मांग 203 गीगावाट थी, जिसमें से 51.5 प्रतिशत की पूर्ति अक्षय ऊर्जा ने की। इसका मतलब है कि हर दूसरी बल्ब अब सौर या पवन ऊर्जा से जल रही थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 (मार्च 2026 तक) में भारत का कुल बिजली उत्पादन 1,845.921 बिलियन यूनिट रहा, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 29.2 प्रतिशत यानी 538.97 बिलियन यूनिट थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत धीरे-धीरे कोयले पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और सौर तथा पवन जैसे साफ स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने COP26 में जो 500 गीगावाट का लक्ष्य रखा था, उस पर तेजी से काम चल रहा है।
भारत की ऊर्जा स्थिति का अवलोकन
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 283.46 गीगावाट की क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित हो चुकी है। इसमें 274.68 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है। अक्षय ऊर्जा में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है, जो 150.26 गीगावाट के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद पवन ऊर्जा (56.09 गीगावाट), बड़ी पनबिजली परियोजनाएं (51.41 गीगावाट), छोटी पनबिजली (5.17 गीगावाट) और बायोएनर्जी (11.75 गीगावाट) का स्थान है। यह विविधता दर्शाती है कि भारत हर संभव साफ स्रोत का उपयोग कर रहा है।
भारत का भविष्य: उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य
भारत अब यहीं नहीं रुकना चाहता। मार्च 2025 में, भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने नए लक्ष्य निर्धारित किए थे। अब भारत 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य रखता है। साथ ही, 2035 तक देश की कुल बिजली क्षमता का 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से आना चाहिए। इसके अलावा, भारत 3.5 से 4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर का कार्बन सिंक (पेड़-पौधे) बनाने की दिशा में भी काम करेगा। यह स्पष्ट है कि हरित ऊर्जा की दौड़ में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में अमेरिका को भी पीछे छोड़ने की कोशिश करेगा।
