भारत की अर्थव्यवस्था: विश्व बैंक की रिपोर्ट में उजागर हुई तेजी और घरेलू मांग का महत्व
भारत की आर्थिक वृद्धि पर विश्व बैंक की नई रिपोर्ट
नई दिल्ली: विश्व बैंक ने हाल ही में भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक व्यापारिक तनावों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं का भारत की आर्थिक वृद्धि पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इसकी नींव मजबूत घरेलू मांग पर आधारित है।
विश्व बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी बेहतर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उपभोक्ता खर्च, निवेश और सरकारी नीतियों के कारण भारत की आर्थिक गतिविधियों में निरंतर वृद्धि हो रही है।
दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर भारत का प्रभाव
दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था को भी मिला सहारा
विश्व बैंक की ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्टस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का सकारात्मक प्रभाव पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
हालांकि, इस रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान को दक्षिण एशिया के आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि विश्व बैंक ने इन्हें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में वर्गीकृत किया है।
घरेलू मांग का महत्व
घरेलू मांग है बढ़ती अर्थव्यवस्था की बड़ी वजह
विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे घरेलू मांग को सबसे बड़ा कारण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स नीतियों में सुधारों का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखा गया है। इन सुधारों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आय का स्तर बढ़ा है, जिससे उपभोग में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे पर बढ़ता खर्च, रोजगार के अवसर और उपभोक्ता विश्वास में सुधार भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहायक हैं।
अमेरिकी टैरिफ का संभावित प्रभाव
अमेरिकी टैरिफ का क्या होगा असर?
रिपोर्ट में अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ का भी आकलन किया गया है। यदि अमेरिका भारत पर मौजूदा टैरिफ बनाए रखता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत तक आ सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में यह फिर से बढ़कर 6.6 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अमेरिका भारतीय निर्यात पर और अधिक टैरिफ लगाता है, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर होने की संभावना नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का बड़ा हिस्सा घरेलू मांग से आता है, जो पहले से ही मजबूत बनी हुई है। यही घरेलू मांग आने वाले वर्षों में भी अर्थव्यवस्था को गति देती रहेगी।
