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भारत की कूटनीति ने फिर किया कमाल: ईरान से रिहा हुए 10 भारतीय नाविक

भारत की विदेश नीति ने एक बार फिर अपनी प्रभावशीलता साबित की है, जब ईरान ने 9 महीनों से जेल में बंद 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया। इस कूटनीतिक सफलता के पीछे कई मंत्रालयों और एजेंसियों के संयुक्त प्रयास शामिल थे। जानें इस रिहाई की पूरी कहानी और कैसे भारत ने संयमित बातचीत के जरिए यह उपलब्धि हासिल की।
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भारत की कूटनीति ने फिर किया कमाल: ईरान से रिहा हुए 10 भारतीय नाविक

नई दिल्ली में कूटनीतिक सफलता


नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति ने एक बार फिर अपनी प्रभावशीलता साबित की है। ईरान की सरकार ने 9 महीनों से जेल में बंद 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया है, जिसे भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। भारत सरकार के डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग ने इस सफल रिहाई की जानकारी दी है। ये नाविक जुलाई 2025 में ईरान के जस्क पोर्ट के निकट एक जहाज पर हिरासत में लिए गए थे और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया था।


कूटनीतिक प्रयासों की सफलता

इन नाविकों ने लगभग 9 महीनों तक जेल में बिताए। इस दौरान उनकी रिहाई के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे। भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने एक बयान जारी कर बताया कि कूटनीतिक प्रयास सफल रहे हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस बयान में कहा गया है कि सभी नाविक सुरक्षित और स्वस्थ हैं, और उन्हें जल्द ही वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


नाविकों की रिहाई की प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार, जुलाई 2025 में ईरान के जस्क पोर्ट के पास जहाज को रोके जाने के बाद इन भारतीय नाविकों को पहले हिरासत में लिया गया और फिर जेल भेजा गया। उनके परिवार वाले लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे थे। सरकार ने बताया कि विदेश मंत्रालय, पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय, तेहरान में भारतीय दूतावास, जहाज प्रबंधन कंपनी और अन्य संबंधित एजेंसियों ने मिलकर कूटनीतिक प्रयास किए। इन प्रयासों के कारण सभी नाविकों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी। वर्तमान में सभी नाविक सुरक्षित हैं और एक-दूसरे से मिल चुके हैं, और उन्हें वापस लाने की तैयारी की जा रही है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। इस मामले में भारत सरकार ने सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए शांति और कूटनीतिक रणनीति अपनाई। माना जा रहा है कि संयमित बातचीत और निरंतर सार्थक राजनयिक प्रयासों के कारण नाविकों की रिहाई का रास्ता आसान हुआ।