भारत की चाबहार परियोजना: ईरान का महत्वपूर्ण आग्रह
भारत की वैश्विक कूटनीति में बढ़ती भूमिका
नई दिल्ली: भारत की वैश्विक कूटनीति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत से एक महत्वपूर्ण अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत को चाबहार बंदरगाह परियोजना की गति को धीमा नहीं करना चाहिए। अमेरिकी प्रतिबंधों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद ईरान का यह बयान भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर नए सिरे से विचार करने का संकेत है।
चाबहार परियोजना की चुनौतियाँ
चाबहार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने भारत को विशेष छूट दी थी, जो इस वर्ष 26 अप्रैल को समाप्त हो गई। इस छूट के खत्म होते ही भारत में इस परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर संदेह उत्पन्न हो गया है। ईरानी विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि वाशिंगटन के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भारत का निवेश धीमा हो गया है। हालांकि, उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत इस बाधा को पार करेगा।
चाबहार: व्यापार का सुनहरा द्वार
अब्बास अराघची ने कहा कि चाबहार केवल एक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक सुनहरा गलियारा बताया, जो मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक सीधी पहुंच प्रदान करेगा। इसी तरह, यूरोपीय और मध्य एशियाई देश भी इस मार्ग का उपयोग करके सीधे हिंद महासागर तक पहुंच सकते हैं। यह कनेक्टिविटी पूरे क्षेत्र के व्यापारिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है, जिसमें भारत की केंद्रीय भूमिका है।
भारत की रणनीति और विकल्प
अमेरिकी प्रतिबंधों के इस नए दौर में, भारत का विदेश मंत्रालय बेहद सतर्कता से कदम उठा रहा है। भारत इस समय वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही, एक 'प्लान बी' पर भी काम चल रहा है, जिसके तहत भारत चाबहार में अपनी हिस्सेदारी किसी स्थानीय ईरानी इकाई को अस्थायी रूप से सौंप सकता है। उल्लेखनीय है कि इस बार के बजट में सरकार ने इसके लिए कोई राशि नहीं रखी थी।
मध्य पूर्व में भारत की भूमिका
ईरान ने इस कठिन समय में भारत की तटस्थ छवि की सराहना की है। विदेश मंत्री ने कहा कि फारस की खाड़ी के सभी देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं, इसलिए उसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों को शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है, जहां भारत मध्यस्थ बन सकता है।
चाबहार का सामरिक और आर्थिक महत्व
भारत के लिए चाबहार बंदरगाह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक मार्ग प्रदान करता है। यह चीन के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने का भी एक साधन है। भारत ने 2024 में इसके शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का समझौता किया था और अब तक इस महत्वपूर्ण परियोजना में लगभग 1000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है।
