भारत की नई रणनीति: रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन की निर्भरता कम करने की कोशिश
भारत ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका और रूस के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती अहमियत के बीच, भारत ने क्वाड देशों के साथ मिलकर नई रणनीतियों पर काम करना शुरू किया है। जानें कैसे ये खनिज आधुनिक तकनीक के लिए आवश्यक हैं और भारत की योजना क्या है।
| May 29, 2026, 12:56 IST
रेयर अर्थ मिनरल्स की अहमियत
दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक, मिसाइलें, इलेक्ट्रिक वाहन, रडार, फाइटर जेट और स्मार्टफोन—इन सभी की असली ताकत क्या है? यह न तो तेल है और न ही गैस, बल्कि एक ऐसा खजाना है जिसके बिना आधुनिक दुनिया ठहर सकती है। इसी खजाने को लेकर वैश्विक स्तर पर एक नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है। चीन ने जिस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, अब उसी के लिए भारत ने अमेरिका, रूस, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग बढ़ाया है। दरअसल, रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिज वे विशेष तत्व हैं जिनके बिना आज की हाई-टेक दुनिया अधूरी है। यदि ये खनिज रुक जाएं, तो तकनीकी प्रगति ठहर सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में इन खनिजों पर चीन का नियंत्रण सबसे अधिक है।
भारत की नई साझेदारियां
चीन इस समय दुनिया की लगभग 70% रेयर अर्थ खनन और 90% प्रोसेसिंग क्षमता पर नियंत्रण रखता है। इसका मतलब है कि कई देश इन आवश्यक खनिजों के लिए चीन पर निर्भर हैं। इसी कारण भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भारत ने पहले अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर साझेदारी की और अब रूस के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते में रेयर अर्थ मिनरल्स की प्रोसेसिंग, उच्च गुणवत्ता वाले धातुओं का निर्माण, मैग्नेट तकनीक विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग में उपयोग होने वाले उपकरणों पर ध्यान दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस की परमाणु कंपनी रोसाटम और भारत की नक्सिन जियोकेम के बीच एक समझौता हुआ है, जिसमें विशेष रूप से नियोमियम आयरन बोरोन मैग्नेट तकनीक पर काम किया जाएगा। यह उच्च प्रदर्शन वाले मैग्नेट हैं, जो मिसाइलों, रडार, इलेक्ट्रॉनिक मोटर्स और फाइटर जेट्स में उपयोग होते हैं। लेकिन यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं है।
क्वाड देशों की पहल
हाल ही में क्वाड देशों—भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया—ने एक महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल इनिशिएटिव लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य सप्लाई चेन को मजबूत करना, चीन पर निर्भरता को कम करना, 20 अरब डॉलर का निवेश करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई रणनीति विकसित करना है। इसका मतलब यह है कि दुनिया अब मान रही है कि यदि चीन सप्लाई रोकता है, तो पूरी तकनीकी उद्योग प्रभावित हो सकती है। यही चिंता भारत सहित कई देशों को नई रणनीतिक साझेदारियों की ओर बढ़ा रही है। अब सवाल यह है कि भारत के पास क्या है? उत्तर है कि भारत के पास भी महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत में लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, टाइटेनियम, रेयर अर्थ तत्व, सिलिकॉन और टंगस्टन जैसे खनिज मौजूद हैं। सरकार ने ओसा, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की योजना भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है: भारत केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि भविष्य में एक बड़ी सप्लाई ताकत बनना चाहता है।
