भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता: वैश्विक नेतृत्व की नई दिशा
भारत का वैश्विक नेतृत्व
पूरी दुनिया इस समय डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित नीतियों, टैरिफ युद्ध और जियोपॉलिटिकल अराजकता के कारण भय के माहौल में जी रही है। ऐसे में भारत चुपचाप लेकिन दृढ़ता से एक वैकल्पिक वैश्विक नेतृत्व की नींव रख रहा है। ब्रिक्स समिट 2026, जिसकी मेज़बानी भारत करेगा, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि 2025 में भारत और अमेरिका के संबंधों में ठंडापन आया, तो 2026 और भी अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसका कारण यह है कि ट्रंप अब खुद को वैश्विक व्यवस्था से ऊपर मानने लगे हैं। वेनेजुएला के संसाधनों पर दबाव, क्यूबा पर प्रतिबंधों की धमकी, मेक्सिको पर टैरिफ, और ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैक्स की चेतावनी, सभी मिलकर दुनिया को एक अराजक और अस्थिर दौर में धकेल रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती शक्तियों पर पड़ेगा।
ब्रिक्स 2026: एक महत्वपूर्ण मोड़
भारत के लिए ब्रिक्स 2026 एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय कूटनीति इस समिट के माध्यम से न केवल भारत का, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ का भविष्य भी निर्धारित कर सकते हैं। हाल ही में, भारत ने आधिकारिक रूप से ब्रिक्स की अध्यक्षता 2026 संभाल ली है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने दिल्ली में एक समारोह में सम्मेलन का लोगो, थीम और वेबसाइट का अनावरण किया। इस अवसर पर ब्राजील, चीन, रूस जैसे प्रमुख ब्रिक्स देशों के एंबेसेडर भी उपस्थित थे।
ब्रिक्स की थीम और महत्व
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की अध्यक्षता के तहत थीम और लोगो के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स को समावेशी और मानव केंद्रित बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि समूह के 20 साल पूरे होने के अवसर पर ब्रिक्स की अध्यक्षता का विशेष महत्व है। इस यात्रा में ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। वर्तमान वैश्विक माहौल कई चुनौतियों से भरा हुआ है, जिनमें जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं, जटिल आर्थिक परिदृश्य और जलवायु संबंधी चुनौतियां शामिल हैं।
ब्रिक्स का वैश्विक प्रभाव
आज ब्रिक्स कोई साधारण समूह नहीं है। इसके 11 सदस्य देश लगभग 50% विश्व जनसंख्या, 40% वैश्विक जीडीपी और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाल ही में यूरोपीय संसद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब समय है ब्रिक्स प्लस देशों के साथ करीबी सहयोग बढ़ाने का। ब्रिक्स 2026 भारत के लिए केवल एक समिट नहीं है, बल्कि यह भारत की नेतृत्व परीक्षा भी है। यह ग्लोबल साउथ की उम्मीदों का प्रतीक है और दुनिया को एक वैश्विक दिशा दिखाने का अवसर है। यदि भारत इस चुनौती में सफल होता है, तो 'वसुदेव कुटुंबकम' केवल एक नारा नहीं, बल्कि वैश्विक नीति बन सकता है।
