भारत की वायुसेना को मिलेगें 114 नए राफेल जेट, सुरक्षा में होगा बड़ा इजाफा
नई दिल्ली में ऐतिहासिक रक्षा सौदा
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होने जा रही है। रक्षा मंत्रालय इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर विचार करेगा। लगभग ₹3.25 लाख करोड़ की इस डील से न केवल भारत की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि मेक इन इंडिया पहल को भी नई दिशा मिलेगी।
स्वदेशी निर्माण का महत्व
भारत में निर्मित होंगे 96 से अधिक विमान
इस विशाल सौदे की एक प्रमुख विशेषता इसका स्वदेशीकरण है। प्रारंभिक 12 से 18 विमानों को फ्रांस से सीधे लाया जाएगा, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट, टाटा जैसी भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर भारत में मेंटेनेंस और मरम्मत की सुविधाएं स्थापित करेगी।
ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की सफलता
इस सौदे में तेजी लाने का मुख्य कारण हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर है। सूत्रों के अनुसार, राफेल ने अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के माध्यम से चीन की PL-15 मिसाइलों को मात देकर अपनी क्षमता साबित की थी। इसी प्रदर्शन के बाद वायुसेना ने सरकार को 114 अतिरिक्त विमानों का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।
हथियारों का एकीकरण
हथियारों के एकीकरण पर जोर
भारत सरकार इस डील के तहत फ्रांस से एक विशेष अनुमति मांग रही है, ताकि वह इन विमानों में अपने स्वदेशी हथियार और मिसाइल सिस्टम को जोड़ सके। हालांकि, विमान का मुख्य सोर्स कोड अभी भी फ्रांस के पास रहेगा।
राफेल का चयन
F-35 और Su-57 को पीछे छोड़ते हुए
यह निर्णय तब लिया गया है जब अमेरिका ने अपना F-35 और रूस ने Su-57 भारत को पेश किया था, लेकिन भारत ने अपने पुराने साथी राफेल पर भरोसा जताने का निर्णय लिया है। इस डील के बाद भारत के पास राफेल की कुल संख्या 176 (IAF + नेवी) हो जाएगी।
भविष्य की वायुसेना की योजना
भविष्य की वायुसेना का रोडमैप
वायुसेना का उद्देश्य अपनी स्क्वाड्रन की ताकत को बढ़ाना है। भविष्य में भारतीय आसमान की सुरक्षा का दायित्व मुख्य रूप से Su-30 MKI, राफेल, और स्वदेशी LCA मार्क 1A के कंधों पर होगा। 2035 तक भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी सेना में शामिल करने की योजना बना रहा है।
