भारत की विदेश नीति पर यूरोपीय यूनियन की नई रिपोर्ट: अमेरिका और चीन के साथ संबंधों में बदलाव
यूरोपीय यूनियन ने भारत की विदेश नीति पर एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह बताया गया है कि भारत अमेरिका, रूस, ब्रिक्स, जी20 और ग्लोबल साउथ के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से कैसे कार्य कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता को सक्रिय रूप से अपनाया है। इसके अलावा, भारत और चीन ने वेनेजुएला के तेल बाजार में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे वैश्विक तेल कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और वैश्विक तेल बाजार में हो रहे बदलावों के बारे में।
| Jan 14, 2026, 19:52 IST
यूरोपीय यूनियन की अध्ययन रिपोर्ट
यूरोपीय यूनियन वर्तमान में भारत की विदेश नीति का गहन अध्ययन कर रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यूरोप ने स्वीकार किया है कि भारत अमेरिका, रूस, ब्रिक्स, जी20 और ग्लोबल साउथ के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से कैसे कार्य कर रहा है। यह स्थिति यूरोप के लिए एक चुनौती बन गई है। इसी बीच, भारत और चीन ने वेनेजुएला के तेल बाजार में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे अमेरिका की स्थिति में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। दरअसल, वैश्विक तेल बाजार में हलचल फिर से तेज हो गई है। लंबे समय बाद, वेनेजुएला का कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसी करने जा रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण, वेनेजुएला का तेल बाजार से लगभग गायब हो गया था, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं।
भारत और चीन की रिफाइनरियों की बातचीत
दुनिया की प्रमुख कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों, जैसे कि ट्रेफिग्रा, ने भारत और चीन की रिफाइनरियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि मार्च से वेनेजुएला का तेल सप्लाई किया जा सके। इन कंपनियों को अमेरिकी सरकार से विशेष अनुमति मिली है कि वे वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर सकें। इसका मतलब है कि जो तेल वर्षों से गोदामों में पड़ा था, वह अब कानूनी तरीके से जहाजों में लोड किया जाएगा। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक बन चुका है, और सस्ता तेल सीधे लाभ का स्रोत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनेजुएला का तेल ब्रेंट क्रूड से 8 से 8.5 डॉलर प्रति बैरल सस्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कारण इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम इस डील में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
चीन की वापसी और अमेरिका की नई रणनीति
चीन की सरकारी कंपनी पेट्रो चाइना, जो पहले वेनेजुएला का बड़ा ग्राहक थी, अब फिर से इस बाजार में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है। खास बात यह है कि इस बार डील छोटे प्राइवेट रिफाइनरियों के बजाय सीधे सरकारी कंपनियों के साथ की जा रही है। इसका मतलब है कि तेल की सप्लाई अब छुपे रास्तों से नहीं, बल्कि खुले और वैध तरीके से होगी। यह दर्शाता है कि अमेरिका अब वेनेजुएला को पूरी तरह से अलग-थलग नहीं रखना चाहता है।
ग्लोबल ऑयल प्राइस पर प्रभाव
इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा। ईरान में सप्लाई में रुकावट के बीच, वेनेजुएला का तेल कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है, जिससे दुनिया को थोड़ी राहत मिलेगी। अब दूसरी महत्वपूर्ण खबर पर आते हैं। वर्ष 2025 में, यूरोपीय यूनियन ने भारत की विदेश नीति पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह था कि भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता को सक्रिय रूप से अपनाया है। ईयू का मानना है कि भारत किसी एक गुट में नहीं बंधा है, न ही अमेरिका का जूनियर पार्टनर है, और न ही रूस या चीन के दबाव में है। भारत की नीति सक्रिय बहु-आधारिकता है, जिसमें अमेरिका से तकनीक, ब्रिक्स से ग्लोबल साउथ और जी20 से वैश्विक शासन सभी को एक साथ लाया गया है।
