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भारत की संसद में विशेष सत्र: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चर्चा

भारत की संसद आज से तीन दिनों के विशेष सत्र में है, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करना और 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करना है। विपक्ष इस परिसीमन का विरोध कर रहा है, इसे दक्षिण भारतीय राज्यों के खिलाफ मानते हुए। जानें इस सत्र का महत्व और आगे की संभावनाएं।
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भारत की संसद में विशेष सत्र: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चर्चा

विशेष सत्र की शुरुआत


आज से, भारत की संसद तीन दिनों के विशेष सत्र में जुटी है। इस दौरान, सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जो चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव ला सकते हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026, और संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन विधेयक शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों में वृद्धि करना और 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू करना है। हालांकि, विपक्ष इस परिसीमन का विरोध कर रहा है, इसे दक्षिण भारतीय राज्यों के खिलाफ बताया जा रहा है।


महिला आरक्षण पर ध्यान केंद्रित

इस सत्र का सबसे प्रमुख मुद्दा महिला आरक्षण का कार्यान्वयन है। 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब तक लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि यह नए परिसीमन पर निर्भर करता है। सरकार अब संविधान संशोधन के माध्यम से इसे 2029 के चुनावों से पहले लागू करने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की है। भाजपा ने अपने सांसदों के लिए तीन दिवसीय व्हिप जारी किया है, यह दावा करते हुए कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में सुधार होगा।


परिसीमन और लोकसभा सीटों का विस्तार

परिसीमन विधेयक 2026 के तहत, 1971 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाकर सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा। इससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 हो सकती हैं। सरकार का कहना है कि जनसंख्या में बदलाव, शहरीकरण और प्रवास के कारण कई क्षेत्रों में असमानता उत्पन्न हुई है, इसलिए नया परिसीमन आवश्यक है। लेकिन विपक्ष, विशेषकर दक्षिण के राज्यों का कहना है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों को लाभ होगा और दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर हो जाएगी।


विपक्ष का विरोध और चिंताएं

विपक्षी दलों ने परिसीमन का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में बदलाव कर रही है। द्रमुक ने परिसीमन के खिलाफ काले झंडे का प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। विपक्ष का तर्क है कि 2021 की जनगणना (जो 2027 में आएगी) का इंतजार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि इतने बड़े संवैधानिक बदलाव को केवल तीन दिन के सत्र में क्यों लाया जा रहा है। INDIA गठबंधन महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध कर रहा है।


सत्र का महत्व और आगे की संभावना

यह विशेष सत्र भारत की चुनावी राजनीति और संघीय ढांचे पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यदि विधेयक पारित होते हैं, तो 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू होगा और लोकसभा की सीटें भी बढ़ेंगी। इससे उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इस सत्र में तीखी बहस की संभावना है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस सत्र का परिणाम आने वाले वर्षों की भारतीय राजनीति की दिशा को निर्धारित करेगा।