भारत-चीन के बीच शक्सगाम घाटी पर तनाव बढ़ा
भारत-चीन संबंधों में नई चुनौतियाँ
चीन की नीति हमेशा 'डिनाई, डिले और डोमिनेट' पर आधारित रही है, चाहे वह साउथ चाइना सी हो, डोकलाम, गलवान या फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर। चीन एक ओर भारत के साथ शांति का हाथ बढ़ाता है, जबकि दूसरी ओर वह विवाद उत्पन्न करने की कोशिश करता है। भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव के बीच, चीन ने एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर के शक्सगाम घाटी पर अपना दावा पेश किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
शक्सगाम घाटी का इतिहास
शक्सगाम घाटी, जो भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, 1947-48 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया था। 1963 में पाकिस्तान ने इसे चीन को सौंप दिया, जबकि भारत इस समझौते को मान्यता नहीं देता। यह क्षेत्र 5,180 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और भारत का मानना है कि यह संवैधानिक रूप से उसका हिस्सा है।
भारत का आधिकारिक रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं।
चीन की प्रतिक्रिया
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भारत की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस क्षेत्र का उल्लेख किया जा रहा है, वह चीन का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच 1960 के दशक में सीमा समझौता हुआ था, और यह उनके संप्रभु अधिकारों का हिस्सा है।
शक्सगाम में चीन की गतिविधियाँ
हाल ही में, चीन ने शक्सगाम में एक बारहमासी सड़क का निर्माण शुरू किया है, जबकि भारत इस पर लगातार आपत्ति जताता रहा है। यह सड़क सियाचिन ग्लेशियर से 49 किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे भारत की रक्षा स्थिति पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
