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भारत-चीन संबंधों में बदलाव: क्या चीन पर भरोसा किया जा सकता है?

भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में हालिया बदलावों पर चर्चा की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। क्या चीन पर भरोसा किया जा सकता है? इस लेख में हम इन सवालों का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि भारत को क्या कदम उठाने चाहिए।
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भारत-चीन के रिश्तों में नई संभावनाएं

Bharat Ek Soch: कहा जाता है कि जब एक दरवाजा बंद होता है, तो कई नए दरवाजे खुलते हैं। यह सिद्धांत कूटनीतिक संबंधों पर भी लागू होता है। वर्तमान में, चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ होंगे। इन तीनों नेताओं के बीच तनाव का एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं। अमेरिका के टैरिफ नीतियों से कई देश प्रभावित हैं, और भारत पर अमेरिका ने 50% की इंपोर्ट ड्यूटी लगा रखी है, जो ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है।


चीन के रुख में बदलाव का कारण

कूटनीति में हर देश एक-दूसरे से यही सवाल पूछता है, 'हम आपके लिए क्या हैं?' ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने जिन ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग किया, उनमें से अधिकांश चीनी निर्मित थे। पिछले कुछ वर्षों में, चीन ने भारत के साथ कई बार तनाव पैदा किया है, लेकिन हाल ही में, चीन भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है। यह बदलाव क्यों हो रहा है? इसका मुख्य कारण अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप हैं, जिनकी टैरिफ नीतियों का प्रभाव चीन पर भी पड़ रहा है।


भारत का अमेरिकी बाजार में संघर्ष

कानपुर के चमड़ा उद्योग और मुरादाबाद के पीतल उद्योग के कारोबारी चिंतित हैं। 27 अगस्त से लागू 50% टैरिफ ने भारतीय उत्पादों को अमेरिका में महंगा बना दिया है। उदाहरण के लिए, यदि भारत में बनी एक शर्ट पहले 10 डॉलर में बिकती थी, तो अब उसे 16.40 डॉलर में बेचना होगा। इसके विपरीत, चीन में बनी शर्ट सस्ती है। ऐसे में भारतीय उत्पादों को अमेरिका में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।


चीन पर भरोसा करना मुश्किल

विश्व की जीडीपी में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था 19 ट्रिलियन डॉलर की है। भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना अमेरिका और चीन से करना उचित नहीं है। भारत को इस संकट को अवसर के रूप में देखना चाहिए और किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति की है, लेकिन भारत को सतर्क रहना होगा।


ट्रंप की अनिश्चितता

कूटनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते। ट्रंप की नीतियों के कारण भारत को कई अवसर मिले हैं, लेकिन उनकी अनिश्चितता से भी सावधान रहना होगा। पाकिस्तान के साथ ट्रंप का समर्थन भारत के लिए खतरा बन सकता है।


क्या चीन पाकिस्तान में आतंकवाद रोक पाएगा?

यदि चीन वास्तव में भारत के साथ दोस्ती चाहता है, तो क्या वह पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई बंद करेगा? यह सवाल महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन और अमेरिका दोनों ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया है।