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भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष का खतरा: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट

हालिया अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को एक गंभीर परमाणु खतरे के रूप में प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही दोनों देश युद्ध नहीं चाहते, लेकिन आतंकवादी तत्व किसी भी समय स्थिति को बिगाड़ सकते हैं। तुलसी गबार्ड के अनुसार, पाकिस्तान की मिसाइलें अब अमेरिका को भी निशाना बना सकती हैं। 2035 तक मिसाइल खतरों की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
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भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष का खतरा: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का चिंताजनक खुलासा

हाल ही में अमेरिकी खुफिया समुदाय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है, जो दर्शाती है कि भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव केवल कूटनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह एक संभावित परमाणु आपदा का संकेत है। रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भले ही दोनों देश युद्ध की इच्छा नहीं रखते, लेकिन अनियंत्रित आतंकवादी तत्व किसी भी समय एक ऐसा 'ट्रिगर' सक्रिय कर सकते हैं, जिससे दोनों परमाणु शक्तियों के बीच टकराव हो सकता है। तुलसी गबार्ड द्वारा किया गया यह खुलासा कि पाकिस्तान की मिसाइलें अब केवल भारत को ही नहीं, बल्कि अमेरिका को भी निशाना बना सकती हैं, वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 2035 तक मिसाइल खतरों की संख्या 3,000 से बढ़कर 16,000 तक पहुंचने की संभावना इस बात का संकेत है कि दुनिया एक अत्यधिक अस्थिर और घातक हथियारों की होड़ में प्रवेश कर रही है, जहां एक छोटी सी गलती भी लाखों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है.


भारत-पाकिस्तान के संबंधों से उत्पन्न परमाणु खतरे का आकलन

अमेरिकी सीनेट में बुधवार को पेश की गई ‘यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी’ की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है। इस 34 पृष्ठों की रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों देश सीधे संघर्ष नहीं चाहते, फिर भी आतंकवादी तत्वों के लिए संकट उत्पन्न करने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं। दस्तावेज में उल्लेख किया गया है, 'भारत-पाकिस्तान संबंधों के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है, क्योंकि अतीत में इन दोनों देशों के बीच टकराव हो चुके हैं, जिससे तनाव बढ़ने की संभावना है।'


पिछले वर्ष जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में पहलगाम के निकट हुए आतंकवादी हमले ने संघर्ष को भड़काने वाले आतंकवादी हमलों के खतरे को स्पष्ट किया है। दस्तावेज में कहा गया है, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से हालिया परमाणु तनाव कम हुआ है, और हमारा आकलन है कि कोई भी देश खुले संघर्ष में नहीं लौटना चाहता, लेकिन आतंकवादी तत्वों के लिए संकट उत्पन्न करने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं।'


दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं, और सीमा पार झड़पें होती रहती हैं, क्योंकि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में पाक विरोधी आतंकवादी समूहों की उपस्थिति से निराश है। अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सांसदों को बताया कि पाकिस्तान द्वारा विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में अमेरिका को निशाना बनाने की क्षमता हो सकती है।


मिसाइल खतरों में वृद्धि का आकलन

सीनेट की खुफिया समिति के समक्ष राष्ट्रीय खुफिया निदेशक गबार्ड ने यह भी कहा कि अमेरिका को होने वाले खतरे वर्तमान में 3,000 से अधिक मिसाइलों से बढ़कर 2035 तक 16,000 से अधिक मिसाइलों तक पहुंचने की संभावना है। गबार्ड ने कहा कि अमेरिका की सुरक्षित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता सामरिक खतरों से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने यह भी कहा, 'हालांकि, रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान कई उन्नत या पारंपरिक मिसाइल वितरण प्रणालियों पर शोध और विकास कर रहे हैं, जो हमारे देश को खतरे में डाल सकते हैं।'