भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा से रूस की नई रणनीति
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस यात्रा के दौरान, रूस ने भारत के प्रति अपनी मजबूत समर्थन की पुष्टि की है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति के मामले में। ईरान और चीन की प्रतिक्रियाओं के बीच, भारत और रूस के बीच सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जानें इस यात्रा के दौरान चर्चा किए गए प्रमुख मुद्दे और रूस की नई रणनीति के बारे में।
| May 25, 2026, 12:18 IST
रूस और भारत की मजबूत साझेदारी
जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, तो इससे चीन, ईरान और कई यूरोपीय देशों में हलचल मच गई। ईरान ने इस यात्रा पर तंज कसा, जबकि रूस ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने अमेरिका को चौंका दिया है। रूस और भारत के बीच की दोस्ती कई बार साबित हो चुकी है, और हालिया ऊर्जा संकट इसका एक उदाहरण है। जब पूरी दुनिया में तेल की कमी हो रही है, रूस भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। हाल ही में, अमेरिका और भारत के बीच एक डील के बावजूद, रूस ने स्पष्ट किया कि भारत को अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता है। रूस के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि वे भारत को तेल, गैस और कोयले की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने देंगे।
रूस का बड़ा ऐलान
रूस ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। रूस के डिप्टी चीफ मिशन रोमन ने बताया कि रूस भारत के लिए कच्चे तेल का विश्वसनीय सप्लायर बना हुआ है। दोनों देश अब भारतीय शहरों में गैस सप्लाई के लिए सीएनजी फिलिंग स्टेशनों के विस्तार और नई तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं की खोज कर रहे हैं। यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। रूस भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, और यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट बढ़ा दी है। हाल ही में, भारत और रूस ने एलपीजी खरीदने के मुद्दे पर उच्च स्तरीय बातचीत की है। इसके अलावा, भारत अपने पूर्वी हिस्से में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज करने पर विचार कर रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान चर्चा के मुद्दे
अमेरिका के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। पहले दिन, पीएम मोदी और मार्को रुबियो के बीच सुरक्षा, मध्य पूर्व संकट, व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषयों पर बातचीत हुई। इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता में भी कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। इस बातचीत में जयशंकर ने भारतीय यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही चुनौतियों को उठाया, जिसके जवाब में रुबियो ने भारतीयों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान को स्वीकार किया।
