भारत में ला-नीना का प्रभाव: सर्दियों में कड़ाके की ठंड की संभावना

भारत में ला-नीना का प्रभाव
भारत में ला-नीना का प्रभाव: इस वर्ष भारत में मानसून ने काफी तबाही मचाई है। अब मौसम विशेषज्ञों ने एक और गंभीर भविष्यवाणी की है, जो आपको चौंका सकती है! इस बार सर्दी अपने चरम पर पहुंचने वाली है और देश के कई हिस्सों में अत्यधिक ठंड का सामना करना पड़ सकता है। इसका मुख्य कारण ला-नीना का प्रभाव है, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक मौसम को भी प्रभावित करेगा।
ला-नीना एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है। यह ठंडा पानी वैश्विक मौसम के पैटर्न में बदलाव लाता है। भारत में, ला-नीना का प्रभाव आमतौर पर भारी बारिश और सर्दियों में तीव्र ठंड के रूप में देखा जाता है। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA ने अनुमान लगाया है कि सितंबर से नवंबर के बीच ला-नीना के सक्रिय होने की संभावना 53% है, जो साल के अंत तक 58% तक बढ़ सकती है।
कड़ाके की ठंड का कारण
कड़ाके की ठंड का कारण:
ला-नीना के प्रभाव से इस बार भारत में सर्दियों का तापमान सामान्य से अधिक गिरने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडे समुद्री जल का प्रभाव वायुमंडल पर पड़ता है, जिससे तापमान में कमी आती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में ठंड का प्रकोप अधिक देखने को मिल सकता है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ठिठुरन बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इस बार ला-नीना का प्रभाव कमजोर हो सकता है, फिर भी यह मौसम को ठंडा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मानसून पर ला-नीना का प्रभाव
मानसून पर ला-नीना का प्रभाव:
इस वर्ष मानसून की जोरदार बारिश का कारण भी ला-नीना रहा है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे मौसमी सिस्टम ने पूरे देश में भारी बारिश की। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक बारिश ने अपना कहर बरपाया। ला-नीना के कारण मानसून सामान्य से अधिक सक्रिय रहा, जिसके परिणामस्वरूप कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति भी देखने को मिली। अब यही ला-नीना सर्दियों को और सख्त करने की तैयारी में है।
ला-नीना और एल-नीनो का प्रभाव
ला-नीना और एल-नीनो का प्रभाव:
ला-नीना और एल-नीनो मौसम के दो विपरीत पहलू हैं। जहां ला-नीना ठंडे मौसम और भारी बारिश का कारण बनता है, वहीं एल-नीनो गर्मी और सूखे की स्थिति लाता है। पिछले कुछ वर्षों में 2020 से 2022 तक लगातार तीन साल ला-नीना का प्रभाव रहा, जिसे 'ट्रिपल डिप ला-नीना' कहा गया। इसके बाद 2023 में एल-नीनो ने दस्तक दी, जिससे गर्मी और सूखे की स्थिति बनी। अब एक बार फिर ला-नीना की वापसी हो रही है, जिसका प्रभाव भारत समेत कई एशियाई देशों में सर्दियों को और ठंडा कर सकता है।