भारत में सुपर अल नीनो का खतरा: मौसम में बदलाव की चेतावनी
सुपर अल नीनो का प्रभाव
भारत और अन्य देशों में मौसमी घटनाओं में अजीब बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस समय भारत में नौतपा के दौरान बारिश हो रही है, और मानसून की दस्तक समय से पहले हो रही है। समुद्र का तापमान भी काफी बढ़ चुका है। इस बीच, मौसम विशेषज्ञों ने एक शक्तिशाली 'सुपर अल नीनो' की चेतावनी दी है, जिससे चिंताएँ बढ़ गई हैं।
प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है, और यह 100 वर्षों में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। इस परिवर्तन का सीधा प्रभाव भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मौसमी घटना प्रशांत महासागर को गर्म कर रही है। 1877 में भी एक सुपर अल नीनो आया था, जिसके कारण करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे।
विश्व भर में मौसम में बदलाव
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण इस बार यह मौसमी गतिविधि भयंकर रूप ले सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, मई से जुलाई के बीच सुपर अल नीनो का प्रभाव पूरी तरह से देखने को मिल सकता है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से तेजी से बढ़ रहा है। इस बार मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम में लू और सूखे का संकट उत्पन्न हो सकता है।
भारत में बारिश की संभावनाएँ
भारत में सामान्यतः मानसून के दौरान 870 एमएम बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके 800 एमएम या उससे भी कम रहने की संभावना है। लगभग 60 प्रतिशत खेती मानसून की बारिश पर निर्भर करती है, और यदि बारिश कम होती है, तो इसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर पड़ेगा। खराब मानसून के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और पानी की कमी भी हो सकती है।
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