भारत रत्न की राजनीति: नीतीश कुमार और शिबू सोरेन की चर्चा
भारत रत्न की चर्चा का राजनीतिक पहलू
बिहार और झारखंड में इन दिनों भारत रत्न सम्मान की चर्चा जोरों पर है। दिलचस्प यह है कि यह चर्चा राजनीतिक कारणों से हो रही है। पहले भारत रत्न को राजनीति से दूर रखा जाता था, लेकिन अब यह एक राजनीतिक उपकरण बन गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को इस सम्मान से नवाजे जाने की बात की जा रही है। इसके बाद चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने एनडीए के साथ गठबंधन किया, जबकि कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले नीतीश कुमार ने भी एनडीए में वापसी की। अब नीतीश कुमार को भी भारत रत्न देने की चर्चा हो रही है, जो उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा के अंत से जुड़ी है।
झारखंड में शिबू सोरेन का नाम
झारखंड में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की बात भी चल रही है। यह चर्चा इस राजनीतिक संदर्भ में है कि इसके बाद हेमंत सोरेन अपनी पार्टी को एनडीए में शामिल कर सकते हैं। राज्य में जेएमएम और भाजपा की साझा सरकार बनने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। भाजपा के नेता और राइटविंग मीडिया इस नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि भाजपा आदिवासी राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए जेएमएम के साथ जाने की आवश्यकता महसूस कर रही है।
नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग
हाल ही में पटना में जनता दल यू के मुख्यालय में नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग करने वाले होर्डिंग्स लगाए गए थे, लेकिन मीडिया में खबर आने के बाद उन्हें तुरंत हटा दिया गया। पार्टी के नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नीतीश कुमार को समाजवादी राजनीति का 'अनमोल रत्न' बताते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग की। इस पत्र के बाद पार्टी के नेताओं ने त्यागी पर हमला किया, यह कहते हुए कि उनकी मांग का पार्टी से कोई संबंध नहीं है।
भारत रत्न का अर्थ और राजनीति
क्या भारत रत्न मिलने का मतलब राजनीति से संन्यास लेना होता है? अगर किसी को उसके क्षेत्र में महान उपलब्धियों के लिए यह सम्मान मिलता है, तो क्या उससे यह उम्मीद की जानी चाहिए कि वह उस कार्य को छोड़ देगा? पंडित नेहरू की मिसाल है, जिन्होंने 1955 में भारत रत्न प्राप्त करने के बाद भी प्रधानमंत्री पद पर बने रहे। इसी तरह, सचिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर ने भी अपने क्षेत्रों में काम जारी रखा।
जनता दल यू की चिंताएं
जनता दल यू के नेता नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की चर्चा पर अतिवादी प्रतिक्रियाएं क्यों देते हैं? भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह स्पष्ट नहीं किया कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री का निर्णय विधायकों की संख्या पर निर्भर करेगा। वर्तमान में, दोनों पार्टियों में से कोई भी अकेले सरकार नहीं बना सकती।
भविष्य की राजनीतिक स्थिति
जनता दल यू की चिंता यह है कि भाजपा अब अकेले 89 सीटों वाली पार्टी है और छोटी सहयोगी पार्टियों के साथ मिलकर भी बहुमत नहीं बना सकती। नीतीश कुमार की स्थिति पहले से कमजोर हो गई है, और यही कारण है कि जदयू के नेता हर छोटी बात पर चिंतित रहते हैं। उन्हें साहस के साथ आगे आकर नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग करनी चाहिए, यह दर्शाते हुए कि बिहार की जनता ने उन्हें बहुमत दिया है।
