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भारत सरकार का स्पष्ट बयान: होर्मुज जलडमरूमध्य में अनुमति की आवश्यकता नहीं

भारत सरकार ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं होने की पुष्टि की है। इस बयान में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव के बीच भारतीय जहाजों की स्थिति पर भी चर्चा की गई है। विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के तहत जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता की जानकारी दी। इसके अलावा, भारत की गैस और एलपीजी की आपूर्ति में आई रुकावटों के विकल्पों पर भी प्रकाश डाला गया है। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया।
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भारत सरकार का स्पष्ट बयान: होर्मुज जलडमरूमध्य में अनुमति की आवश्यकता नहीं

भारत का स्पष्ट संदेश


भारत सरकार ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संबंधित अटकलों पर एक स्पष्ट उत्तर दिया है। मंगलवार को जारी एक महत्वपूर्ण बयान में, सरकार ने कहा कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच, केंद्र ने भारतीय जहाजों के बारे में चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के तहत इस जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता है। इस विषय पर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने जानकारी साझा की।


सरकार का महत्वपूर्ण बयान

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जो तेल समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है, से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।


विशेष सचिव का बयान

विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।" उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के अनुसार, जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता है। चूंकि यह जलडमरूमध्य संकरा है, केवल प्रवेश और निकासी मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिनका पालन सभी जहाजों को करना होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किसी प्रकार की फीस या सुरक्षा राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।


फंसे हुए जहाजों की जानकारी

अधिकारी ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे जहाजों में पांच एलपीजी जहाज शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.3 लाख टन रसोई गैस है। इसके अलावा, एक खाली जहाज में एलपीजी भरने का कार्य शुरू हो गया है। इसके साथ ही, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन करने वाला टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और तीन अन्य जहाज नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में हैं।


भारत के विकल्प

भारत की आवश्यक एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है। लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ा है।


भारत आने वाले एलपीजी टैंकर

इससे पहले, एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों जहाज एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। पाइन गैस जहाज में 45,000 टन एलपीजी है और यह 27 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचेगा। वहीं, जग वसंत जहाज में 47,612 टन एलपीजी है और यह 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं। ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाजों में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।