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भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में संकट पर चिंता जताई, सुरक्षा प्राथमिकता

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है। भारत का मानना है कि सैन्य संघर्ष का समाधान नहीं है, और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाए हैं। इस दौरान सदन में हंगामा भी हुआ, जब विपक्ष ने मारे गए नागरिकों का मुद्दा उठाया।
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भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में संकट पर चिंता जताई, सुरक्षा प्राथमिकता

पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर भारत की प्रतिक्रिया


नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और संकट के संदर्भ में भारत सरकार की चिंताओं को साझा किया। उन्होंने राज्यसभा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।



विदेश मंत्री ने बताया कि तनाव कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, ओमान, जॉर्डन, इजराइल और बहरीन के नेताओं से बातचीत की है। भारत का मानना है कि सैन्य संघर्ष का समाधान नहीं है, इसलिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।



भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय


जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए कई चुनौतियाँ लेकर आया है। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं, और ईरान में भी हजारों भारतीय शिक्षा और रोजगार के लिए मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां भारत का वार्षिक व्यापार लगभग 200 बिलियन डॉलर है। इस संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग पर भी प्रभाव पड़ा है, जहां कई भारतीय चालक दल के सदस्य कार्यरत हैं। दुर्भाग्यवश, इस घटनाक्रम में दो भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है और एक लापता है।


भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी


सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समय-समय पर कदम उठाए हैं। विदेश मंत्री ने बताया कि जून 2025 में तनाव के संकेत मिलने के बाद से ही सरकार सतर्क थी। जनवरी 2026 में ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई थी। 14 और 23 फरवरी को भारतीय दूतावास ने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी थी। छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए निकासी प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई थी।


राज्यसभा में हंगामा


जब विदेश मंत्री अपना वक्तव्य दे रहे थे, तब सदन में भारी हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संघर्ष के दौरान मारे गए भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच भी विदेश मंत्री ने अपनी बात पूरी की और कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।