भारत: सुपरपावर बनने की राह में बाधाएं और आकांक्षाएं

भारत की सुपरपावर बनने की यात्रा
लंदन के एक प्रमुख समाचार पत्र ने कहा है कि "अगर अमेरिका भारत को अलग-थलग करता है, तो यह एक ऐतिहासिक गलती होगी।" यह वाक्य पहली नजर में आश्वस्त करता है, जैसे अमेरिका की चूक भारत के लिए एक अवसर है। लेकिन ध्यान से देखने पर यह प्रशंसा नहीं, बल्कि एक प्रकार की टालमटोल है। भारत को अभी भी सुपरपावर बनने का इंतजार है।
भारत ने हमेशा अपनी ताकत को साबित करने की कोशिश की है, लेकिन आज यह स्थिति इतनी स्पष्ट हो गई है कि आकांक्षाएं और विश्वास के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है।
आजादी के समय, नेहरू ने "नियति से साक्षात्कार" की बात की थी, जबकि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के निर्माण और पोखरण में भारत की शक्ति का प्रदर्शन किया। नरसिंह राव ने 1991 में अर्थव्यवस्था को उदार बनाया, और मनमोहन सिंह ने न्यूक्लियर डील के माध्यम से भारत की स्थिति को मजबूत किया। हर प्रधानमंत्री ने अपनी तरह से प्रयास किए, लेकिन आकांक्षा हमेशा जीवित रही।
फिर नरेंद्र मोदी आए, जिन्होंने आकांक्षाओं को नए नारों में लपेट दिया। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसे नारे सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में भारत को महाशक्ति बना पाएंगे? यह एक बड़ा सवाल है।
भारत की आकांक्षाएं भावुक हैं, लेकिन बिना बलिदान और साहस के, ये केवल शब्दों में ही रह जाती हैं। क्या आज का भारत सपने देखना छोड़ चुका है?
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्थिरता और सुरक्षा की भावना है, लेकिन आकांक्षाएं अब भी सुपरपावर बनने की ऊंचाई पर नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय सुरक्षा की छत पर अटकी हैं।
नई सदी में ताकत का स्रोत अब साम्राज्य या कच्चे माल से नहीं, बल्कि मानव क्षमताओं और उनके प्रबंधन से है। राष्ट्र अब इस बात से उठते हैं कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे में कितना निवेश करते हैं।
भारत की कहानी केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखाई देती है। मुंबई जैसे शहर में आकांक्षा और असमानता का सामना करना पड़ता है। आज अंबानी और अदानी जैसे उद्योगपति प्रमुख बन गए हैं, लेकिन क्या यह सही दिशा में है?
जब तक असमानता का समाधान नहीं होता, तब तक भारत आर्थिक शक्ति नहीं बन पाएगा। अर्थव्यवस्था का आकार भले ही बढ़े, लेकिन आम भारतीय की गरिमा का सवाल बना रहेगा।
हम फुटनोट बनकर रह जाएंगे और इन तीन शब्दों में कैद रहेंगे — सुपरपावर इन वेटिंग।