भारतीय बंदरगाहों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका
भारत की बंदरगाह क्षमता में वृद्धि
भारत की सालाना बंदरगाह क्षमता 2030 तक 3,500 एमटीपीए होगी
भारत तेजी से वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। यह जानकारी केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने सिंगापुर समुद्री सप्ताह 2026 के दौरान एक राउंड-टेबल बैठक में दी, जिसमें लगभग 200 निवेशक और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे।
कुमार ने बताया कि भारतीय बंदरगाह अब केवल कार्गो ट्रांसपोर्ट के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे तेजी से एकीकृत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे निवेश को आकर्षित किया जा सके और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
भारतीय बंदरगाहों की क्षमता में वृद्धि
कुमार ने बताया कि 2013-14 से अब तक भारत के बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी होकर 1,400 एमटीपीए से बढ़कर 2,771 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। सरकार ने 2030 तक इसे 3,500 एमटीपीए और 2047 तक 10,000 एमटीपीए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915 मिलियन टन से अधिक कार्गो संभाला, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
भारत का जहाज निर्माण क्षेत्र
विजय कुमार ने यह भी कहा कि भारत जहाज निर्माण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति करने की योजना बना रहा है। देश में एक राष्ट्रीय कंटेनर लाइन बनाई जा रही है, ऊर्जा बेड़े का विस्तार हो रहा है और गिफ्ट सिटी में जहाज वित्तपोषण योजना लागू की गई है। उन्होंने बताया कि अगले 15 वर्षों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये की लागत से 437 जहाजों की मांग को पूरा करने की योजना है।
इसमें तेल और गैस कंपनियों, भारतीय जहाजरानी निगम, ग्रीन टग्स और ड्रेजर्स की जरूरतें शामिल हैं। 34 जहाजों के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। भारत ने 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में सीएमए सीजीएम ने कोचीन शिपयार्ड में 6 ड्यूल-फ्यूल कंटेनर जहाजों का ऑर्डर दिया है, जबकि नॉर्वे की कंपनी रेड्रीएट स्टेनरसन ने स्वान एनर्जी के पीपावाव शिपयार्ड में 6 केमिकल टैंकरों का ऑर्डर दिया है।
