भारतीय राजनीति में आउटसाइडर सीएम क्लब की बढ़ती चर्चा
आउटसाइडर सीएम क्लब की चर्चा
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और भाजपा को कवर करने वाले पत्रकारों के बीच इन दिनों आउटसाइडर सीएम क्लब की चर्चा जोरों पर है। भाजपा के पुराने नेता अपनी पीड़ा को तंज करते हुए व्यक्त कर रहे हैं, जबकि नेतृत्व के फैसले का समर्थन करने वाले नेता यह तर्क दे रहे हैं कि यदि ऐसा नहीं होता, तो भाजपा का भगवा रंग देश के इतने हिस्सों में नहीं फैलता। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन इस बात पर सहमति है कि यह एक रणनीतिक कदम है, जिसका भाजपा को लाभ मिला है। यदि ऐसा न होता, तो अन्य पार्टियों, विशेषकर कांग्रेस से टूटकर भाजपा में शामिल होने के लिए बड़े नेता उत्सुक नहीं होते। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाती है जिनका जमीनी आधार मजबूत होता है और जिनसे पार्टी को लाभ होता है।
नए सदस्यों की एंट्री
आउटसाइडर सीएम क्लब में हाल की एंट्री शुभेंदु अधिकारी की है, जो केवल साढ़े पांच साल पहले भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़ी थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तीन सीटों से 77 पर पहुंचकर शुभेंदु को विधायक दल का नेता बनाया। वे पांच साल तक नेता प्रतिपक्ष रहे और अब मुख्यमंत्री बन गए हैं। इस क्लब में सम्राट चौधरी की एंट्री भी हुई है, जिन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया है। शुभेंदु की तुलना में सम्राट को मुख्यमंत्री बनने में अधिक समय लगा।
अन्य प्रमुख नेता
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री बनने में पांच से छह साल लगे। वे 2015 में भाजपा में शामिल हुए और 2021 में मुख्यमंत्री बने। कर्नाटक में बाहर से आए बसवराज बोम्मई को भी सीएम बनाया गया था, लेकिन वे अब इस पद पर नहीं हैं। इस क्लब में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी शामिल हैं। भाजपा नेताओं में चर्चा है कि भविष्य में कौन सा बाहरी नेता मुख्यमंत्री बन सकता है, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
