मध्य प्रदेश विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्ति का मामला: सजा और राजनीति का खेल
राजेंद्र भारती की सजा और सदस्यता समाप्ति
दिल्ली की एक अदालत ने मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई। उसी रात विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया। दतिया से विधायक भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था, जो मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार माने जाते हैं। इस मामले की जटिलता इस तथ्य में है कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव नजदीक हैं, जहां हर एक वोट की अहमियत होगी। कांग्रेस के पास 66 विधायक हैं, और एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होगी। दिग्विजय सिंह के रिटायर होने और भाजपा की दो सीटें खाली होने के कारण कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है।
राजेंद्र भारती के मामले की दिलचस्पी इस बात में है कि उन्हें सजा सुनाए जाने के दिन ही आधी रात को सचिवालय द्वारा अयोग्यता की अधिसूचना जारी की गई। जब इस बारे में विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया, तो उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि राजेंद्र भारती को सजा की सूचना किसने दी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति, जिसका नाम गौतम था, ने उन्हें सूचना दी। यह ध्यान देने योग्य है कि गौतम न तो सरकारी वकील है और न ही कोई सरकारी कर्मचारी। तोमर ने कहा कि हर नागरिक को सूचना देने का अधिकार है, लेकिन क्या एक नागरिक की सूचना पर विधायक की सदस्यता समाप्त की जा सकती है? इस बीच, राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की है और मध्य प्रदेश विधानसभा से उनकी सीट को खाली न घोषित करने की भी मांग की है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक विक्रम सैनी के मामले में इतनी तत्परता नहीं दिखाई गई थी।
