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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला, SIR प्रक्रिया को बताया विवादित

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया में भाजपा के IT सेल द्वारा विकसित ऐप का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को अमानवीय और लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। ममता ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगी। इस विवाद को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। जानें इस मुद्दे पर ममता का क्या कहना है।
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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला, SIR प्रक्रिया को बताया विवादित

मुख्यमंत्री का आरोप


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विशेष गहन समीक्षा (SIR) के लिए एक ऐसा ऐप उपयोग में लाया जा रहा है, जिसे भाजपा के IT सेल ने विकसित किया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


SIR प्रक्रिया में खामियां

ममता बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना के सागर द्वीप में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया में कई तकनीकी और मानव संसाधन संबंधी समस्याएं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जीवित मतदाताओं को मृत दर्शाया गया है, और गंभीर रूप से बीमार तथा बुजुर्ग लोगों को बार-बार बुलाया जा रहा है, जो कि अमानवीय है।


BJP IT सेल से जुड़े ऐप का आरोप

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग जिस ऐप का उपयोग कर रहा है, वह भाजपा के IT सेल द्वारा बनाया गया है। उन्होंने इसे अवैध, असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ बताया। ममता बनर्जी का कहना है कि यदि यह सच है, तो यह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।


मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला

ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ECI को WhatsApp पंचायत के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह पूरा तंत्र पश्चिम बंगाल के नागरिकों के मतदान अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास है, जिसे उनकी सरकार स्वीकार नहीं करेगी।


सुप्रीम कोर्ट में जाने की योजना

SIR के खिलाफ कानूनी लड़ाई की घोषणा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो वह खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनके पास कानून की डिग्री है, लेकिन वह अदालत में एक सामान्य नागरिक की तरह याचिका दायर करेंगी।


राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR को लेकर उठे विवाद का संबंध केवल तकनीकी मुद्दों से नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों से भी जुड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का प्रभाव आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। ममता बनर्जी का स्पष्ट रुख है कि वह इस प्रक्रिया को जनता के उत्पीड़न के रूप में देखती हैं और इसके खिलाफ अंत तक लड़ाई जारी रखेंगी।