ममता बनर्जी का भाजपा पर हमला: बंगाल में जीत का दावा और चुनाव आयोग पर आरोप
ममता बनर्जी का भाजपा पर तीखा प्रहार
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक रैली में भाजपा और केंद्र सरकार पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे कितनी भी कोशिशें कर ले, वह बंगाल में सत्ता नहीं पा सकेगी। ममता ने 2026 के विधानसभा चुनाव में जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि बंगाल जीतने के बाद उनकी नजर दिल्ली पर भी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब पूरे देश में शासन नहीं कर सकती और उनकी पार्टी के खिलाफ सभी साजिशों का सामना करना पड़ेगा।
I-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी
ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई का किया बचाव: ममता ने आई-पैक के कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान अपनी कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि जब एजेंसी सुबह 6 बजे वहां पहुंची, तब तक उन्होंने 11:45 बजे तक केवल अपनी पार्टी से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को सुरक्षित किया। ममता ने आरोप लगाया कि ईडी ने उनके कार्यालय और दस्तावेजों की जानकारी चुराने की कोशिश की, जिसे उन्होंने निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम टीएमसी अध्यक्ष के रूप में पार्टी की रक्षा के लिए उठाया गया था।
चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप
ममता का चुनाव आयोग पर हमला: मुख्यमंत्री ममता ने केंद्र और भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा कई राज्यों में सत्ता में आने के लिए दबाव बना रही है और सरकारी एजेंसियां केंद्र के इशारों पर काम कर रही हैं। ममता ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग की मदद से महाराष्ट्र का चुनाव अपने पक्ष में किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा इसी रणनीति से बंगाल पर भी कब्जा कर पाएगी।
ममता बनर्जी की लड़ाई जारी
धरना स्थल का ऐलान: ममता बनर्जी ने अपने सांसद कल्याण बनर्जी को निर्देश दिया कि अगला धरना निर्वाचन आयोग के सामने होगा। उन्होंने कहा कि टीएमसी जनता के साथ मिलकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी और किसी भी साजिश का सामना करने के लिए तैयार है। ममता ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने चुनावों में जीत के लिए शक्ति और दबाव का इस्तेमाल किया, लेकिन बंगाल में यह तरीका सफल नहीं होगा।
ममता बनर्जी की यह रैली न केवल चुनावी रणनीति का संकेत है, बल्कि यह भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ उनका स्पष्ट संदेश भी है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि टीएमसी की लड़ाई केवल सत्ता की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संवैधानिक अधिकार और पार्टी की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है।
