ममता बनर्जी की चुनावी चिंताएं: बाहरी मतदाताओं का मुद्दा
ममता बनर्जी की चुनावी स्थिति
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं, इस बार चुनावी माहौल में चिंतित नजर आ रही हैं। हालांकि, कोलकाता के जानकारों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव में उनकी चिंता होती है, लेकिन अंततः वे जीत हासिल करती हैं। चार मई को चुनाव परिणाम क्या होंगे, यह तो समय बताएगा, लेकिन इससे पहले ममता ने कई चिंताओं का इजहार किया है। इनमें से एक यह है कि भाजपा ने दो लाख बाहरी मतदाताओं को बंगाल में लाने का दावा किया है।
यह सवाल उठता है कि ममता बनर्जी को बाहरी मतदाताओं की चिंता क्यों है? क्या तृणमूल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता भाजपा को बाहरी मतदाताओं से वोट दिलाने में मदद कर पाएंगे? यह सवाल महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता के पास सबसे अधिक संख्या में और सबसे उत्साही कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 15 वर्षों तक सत्ता में रहकर अनुभव प्राप्त किया है और उन्हें पता है कि यदि वे सत्ता में लौटती हैं, तो उनका शासन चलता रहेगा। इसलिए, वे असली मतदाताओं को वोट डालने से रोकने या उन्हें परेशान करने का प्रयास करती हैं।
ममता बनर्जी के रहते भाजपा बाहरी मतदाताओं से वोट कैसे प्राप्त कर पाएगी? केंद्रीय बलों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के बावजूद, वास्तविकता यह है कि कोई भी बाहरी मतदाता मतदान केंद्र पर वोट नहीं डाल पाएगा। इसका कारण यह है कि ममता के बूथ एजेंट और कार्यकर्ता हर मतदाता को पहचानते हैं। उनके पास हर घर की जानकारी होती है, जैसे कि कितने मतदाता हैं और कितने रिश्तेदार आए हुए हैं। फिर भी, यदि ममता बनर्जी दो लाख बाहरी मतदाताओं की चिंता कर रही हैं, तो क्या वे चुनाव आयोग पर यह आरोप लगा रही हैं कि उसने फॉर्म छह के माध्यम से इतने बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए हैं?
