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ममता बनर्जी की राजनीति: भाजपा को रोकने या कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति?

क्या ममता बनर्जी की राजनीति भाजपा को रोकने के लिए है, या वे कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति पर चल रही हैं? इस लेख में हम उनकी गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं, जिसमें गोवा और मेघालय में उनकी भूमिका शामिल है। जानें कि कैसे ममता की रणनीतियाँ भाजपा और कांग्रेस दोनों पर प्रभाव डाल रही हैं।
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ममता बनर्जी की राजनीति: भाजपा को रोकने या कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति?

राजनीति की वास्तविकता

राजनीति में अक्सर जो दृश्य दिखाई देता है, वह वास्तविकता से भिन्न होता है। इस संदर्भ में यह प्रश्न उठता है कि क्या ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच वास्तव में वैसी ही प्रतिस्पर्धा चल रही है, जैसी दिखती है? इसके साथ ही, क्या ममता बनर्जी अपने राज्य और देश में भाजपा के खिलाफ सच्चे मन से प्रयासरत हैं? जब हम पश्चिम बंगाल के बाहर तृणमूल कांग्रेस की गतिविधियों पर नजर डालते हैं, तो यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।


बंगाल में, ममता भाजपा के खिलाफ खुलकर लड़ाई लड़ती हैं और हर संभव प्रयास करती हैं कि भाजपा को हराया जा सके। लेकिन जब बात बंगाल के बाहर की आती है, तो उनकी राजनीति कांग्रेस को कमजोर करने और भाजपा को लाभ पहुंचाने की होती है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ जब ममता की पार्टी चुनावी मैदान में थी, तब गोवा में तृणमूल की गतिविधियों ने सबको चौंका दिया। मेघालय में, ममता ने कांग्रेस को तोड़कर उसके कई विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया, जिससे कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो गई।


इस प्रकार, यह स्पष्ट होता है कि ममता बनर्जी की प्राथमिकता बंगाल में भाजपा को रोकना और अन्य राज्यों में कांग्रेस को कमजोर करना है, जिससे भाजपा और एनडीए को लाभ होता है। आगामी विधानसभा चुनावों में भी ममता इसी रणनीति पर चलती नजर आ रही हैं। असम और केरल में उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा।


गोवा में भी तृणमूल को 2022 के विधानसभा चुनाव में 5.2 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 4.9 प्रतिशत वोटों का नुकसान हुआ। सरल शब्दों में, ममता की पार्टी ने कांग्रेस के वोटों में कमी की। अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने भी चुनाव लड़ा और उसे लगभग 7 प्रतिशत वोट मिले। उस समय ममता और केजरीवाल के बीच घनिष्ठ संबंध थे, और दोनों ने मिलकर कांग्रेस को गोवा में समाप्त कर दिया।


असम में कांग्रेस की चुनावी रणनीति गौरव गोगोई के नेतृत्व में चल रही है, जो ममता की पार्टी की प्रमुख नेता सुष्मिता देब से मिल चुके हैं। यदि ममता वास्तव में भाजपा को रोकना चाहती हैं, तो उन्हें कांग्रेस का समर्थन करना चाहिए, लेकिन ऐसा होने की संभावना नहीं है। इसी तरह, केरल में भी ममता ने लेफ्ट के समर्थन वाले विधायक पीवी अनवर को तृणमूल में शामिल किया है, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा। असम में उनकी राजनीति का सीधा लाभ भाजपा को होगा, जबकि केरल में यह सीपीएम को भी लाभ पहुंचा सकती है। ममता का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को कमजोर करना है, चाहे भाजपा और लेफ्ट मजबूत हो जाएं।