ममता बनर्जी ने चुनावी हार के बाद CEC को ठहराया जिम्मेदार, इस्तीफे से किया इनकार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला किया। टीएमसी की प्रमुख ममता ने ज्ञानेश कुमार को चुनाव का विलेन करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी और कहा कि हम हार नहीं गए, बल्कि हमें हराया गया है।
ममता ने कहा, "यह दुखद है कि CEC ने इस चुनाव में लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लूटने और EVM में धांधली करने का काम किया। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वोटिंग के बाद EVM में 80-90% चार्ज कैसे रह सकता है? चुनाव से दो दिन पहले, उन्होंने हमारे लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया और हर जगह छापे मारे। उन्होंने सभी IPS और IAS अधिकारियों को बदल दिया और अपनी पार्टी के लोगों को नियुक्त किया। यह BJP और चुनाव आयोग के बीच की साठगांठ है।"
#WATCH | Kolkata: Outgoing West Bengal CM Mamata Banerjee says, "Sad to say, CEC became the villain of this election to loot the democratic rights of the people and to loot the EVM. Can you tell me that after voting EVM has 80-90% charge? How is it possible? Two days before the… pic.twitter.com/b9Dc1npwWq
— News Media May 5, 2026
उन्होंने आगे कहा कि हमने पूरी मशीनरी के खिलाफ संघर्ष किया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने भी सीधे दखल दिया। उन्होंने वोटर लिस्ट से 90 लाख नाम हटा दिए। जब हम अदालत गए, तो 32 लाख नाम फिर से जोड़े गए। यह सब गंदा और शरारती खेल है। मैंने अपने जीवन में इस तरह का चुनाव पहले कभी नहीं देखा।"
ममता ने कहा, "मुझे बूथ से धक्का देकर बाहर निकाला गया। मैं एक महिला हूं, लेकिन मेरे साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह चिंताजनक है। 200 CRPF और बाहरी गुंडों ने मुझ पर हमला किया। जब मैं वहां पहुंची, तो मेरी गाड़ी को रोका गया। हमारे एजेंटों को मतगणना कक्ष में जाने नहीं दिया गया। मुझे धक्का देकर बाहर निकाला गया।"
ममता ने कहा, "केंद्र सरकार केवल एक पार्टी की सरकार चाहती है। इससे पूरी दुनिया में गलत संदेश जा रहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई नहीं हो रही है। हम फिर से उठेंगे। बंगाल में हमने संघर्ष किया है। हमारी लड़ाई भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के खिलाफ थी। जब आयोग ही बिक जाए और अधिकारी एकतरफा काम करें, तो क्या परिणाम होगा? अब मैं आजाद हूं और अपने तरीके से काम करूंगी।"
