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महाराष्ट्र में एमएनएस का शिवसेना को समर्थन, चुनावी समीकरण में बदलाव

कल्याण डोंबिवली नगर निगम चुनाव के परिणामों के बाद, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इस समर्थन से सत्ता समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। शिवसेना अब सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि एमएनएस के समर्थन से उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है। सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है, और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन आने वाले दिनों में सत्ता की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है।
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महाराष्ट्र में एमएनएस का शिवसेना को समर्थन, चुनावी समीकरण में बदलाव

नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल


नई दिल्ली: कल्याण डोंबिवली नगर निगम चुनाव के परिणामों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित मोड़ आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने अपने प्रतिद्वंद्वी शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया है। यह जानकारी पूर्व एमएनएस विधायक प्रमोद उर्फ राजू पाटिल ने पार्टी के पांच पार्षदों की ओर से साझा की।


सत्ता समीकरण में बदलाव

इस समर्थन से केडीएमसी की सत्ता में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। आज सुबह, शिवसेना के सभी 53 पार्षद नवी मुंबई स्थित कोंकण मंडल आयुक्त कार्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से अपने दल का पंजीकरण कराया। इसी समय, एमएनएस के पांच पार्षदों ने भी अपनी प्रक्रिया पूरी की और शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की।


दोनों पार्टियों का साथ आना क्यों है महत्वपूर्ण?

परंपरागत रूप से एक-दूसरे के खिलाफ रहने वाली इन दोनों पार्टियों का एक साथ आना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 122 सदस्यीय कल्याण डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसके पास 53 सीटें हैं, जबकि भाजपा को 50 सीटें मिली हैं।


शिवसेना यूबीटी को 11 सीटें मिली हैं, जबकि एमएनएस ने पांच सीटें जीती हैं। कांग्रेस को दो सीटें और एनसीपी एसपी को एक सीट प्राप्त हुई है।


सांसद श्रीकांत शिंदे की प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि एमएनएस ने शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था।


श्रीकांत शिंदे ने कहा कि केडीएमसी का मेयर महायुति से ही होगा। मेयर पद को लेकर अंतिम निर्णय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण मिलकर लेंगे।


सत्ता के लिए कितनी सीटों की आवश्यकता?

सूत्रों के अनुसार, 122 सदस्यीय नगर निगम में सत्ता स्थापित करने के लिए 62 सीटों की आवश्यकता होती है। शिवसेना के 53 पार्षदों और एमएनएस के पांच पार्षदों के समर्थन से यह संख्या अब 58 तक पहुंच गई है। यह भी जानकारी मिली है कि शिवसेना यूबीटी के 11 पार्षदों में से कुछ शिंदे गुट के संपर्क में हैं। यदि यह समर्थन मिलता है, तो शिवसेना की स्थिति और मजबूत हो सकती है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा ढाई साल के मेयर पद की मांग के बीच, शिवसेना अपने विकल्पों को मजबूत कर रही है। शिवसेना या तो अपने दम पर सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है या गठबंधन में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकती है। आने वाले दिनों में केडीएमसी की सत्ता की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।