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महाराष्ट्र में भाजपा की परिवारवाद नीति पर उठे सवाल

महाराष्ट्र में भाजपा की नीतियों और परिवारवाद पर सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर अपने परिवार के तीन सदस्यों को बीएमसी चुनाव में उतार रहे हैं, जिससे पार्टी के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर ने सत्ता का दुरुपयोग किया है। जानें इस राजनीतिक स्थिति के बारे में और क्या है इसके पीछे की कहानी।
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महाराष्ट्र में भाजपा की परिवारवाद नीति पर उठे सवाल

भाजपा की नीतियों का प्रभाव

महाराष्ट्र में भाजपा की नीतियों और नियमों का प्रभाव कम होता नजर आ रहा है। यहां के नेता अपनी मर्जी से निर्णय लेते हैं और राजनीति करते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन की स्थिति प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है। सभी पार्टियां एक-दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं, जिससे संभावित समीकरणों की संख्या बढ़ गई है। इस स्थिति में गणितीय आकलन भी असफल हो जाता है। भाजपा का एक नियम परिवारवाद को रोकने का है, जिसमें एक ही परिवार के दो सदस्यों को चुनाव में खड़ा करने से हिचकिचाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में इस नियम का पालन होता नहीं दिखता।


राहुल नार्वेकर का परिवारवाद

इस संदर्भ में विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर की कहानी दिलचस्प है। वे अपने परिवार के तीन सदस्यों को बीएमसी चुनाव में उतार रहे हैं। उनके परिवार के तीनों सदस्य कोलाबा विधानसभा क्षेत्र की तीन अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने खुद उपस्थित होकर नामांकन कराया और अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों के नामांकन को रोकने या रद्द कराने का प्रयास किया। कोलाबा क्षेत्र के वार्ड नंबर 226 से उनके भाई मकरंद नार्वेकर चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उन्हें केवल एक निर्दलीय उम्मीदवार का सामना करना है। वार्ड नंबर 225 में मकरंद की पत्नी हर्षिता नार्वेकर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि वार्ड नंबर 227 में उनकी बहन गौरी शिवालकर चुनावी मैदान में हैं। इस परिवारवाद पर भाजपा में सवाल उठ रहे हैं, वहीं विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि स्पीकर ने सत्ता का दुरुपयोग किया है।