महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन में बढ़ती खींचतान
राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है
मुंबई: महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में, अजित पवार ने पिंपरी चिंचवाड़ के स्थानीय भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। इसे भाजपा पर एक अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है, क्योंकि 2017 से 2022 तक इन नगर निकायों में भाजपा का शासन रहा था।
भाजपा नेता चंद्रशेखर की सलाह
भाजपा नेता चंद्रशेखर ने दी सलाह
इस बयानबाजी के बाद, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने अजित पवार को एक खुली सलाह दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार में शामिल दलों को एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सहयोगी दलों पर निशाना साधने से गठबंधन की एकता प्रभावित होती है।
अजित पवार पर आरोप
'अजित पवार ने समझौते का पालन नहीं किया'
चंद्रशेखर बावनकुले ने जालना नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान कहा कि गठबंधन के नेताओं के बीच पहले यह तय हुआ था कि चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी सहयोगी दल एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार ने इस समझौते का पालन नहीं किया और भविष्य में उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी
निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
यह ध्यान देने योग्य है कि महाराष्ट्र में भाजपा, एनसीपी (अजित पवार गुट) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) मिलकर महायुति सरकार चला रहे हैं। हालांकि, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में यह एकता कमजोर होती दिखाई दे रही है। राज्य के 29 नगर निगम चुनावों में तीनों दल अलग-अलग चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है, जिससे पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
अजित पवार के बयान
अजित पवार ने क्या कहा था?
अजित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ नगर निकायों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं के कारण पुणे में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम के बढ़ते कर्ज को लेकर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनके इन बयानों को भाजपा के कार्यकाल पर सीधा हमला माना जा रहा है।
