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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष का स्पष्ट रुख

महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष ने अपने विचार स्पष्ट कर दिए हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया है, जबकि महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। जानें इस मुद्दे पर उनके तर्क और सरकार की योजनाएं क्या हैं।
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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष का स्पष्ट रुख

महिला आरक्षण पर विपक्ष की स्थिति

महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर पहले यह माना जा रहा था कि विपक्ष के सामने एक दुविधा है, जिससे वे उलझ सकते हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे विपक्ष ने अपने विचार स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, जो लोकसभा में दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी पार्टियां हैं, ने अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। असल में, दुविधा इस बात को लेकर थी कि यदि केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे संविधान संशोधन बिल का विरोध किया जाता है, तो विपक्षी दलों को महिला आरक्षण का विरोधी माना जाएगा। यह खतरा अब भी बना हुआ है, लेकिन विपक्ष अब यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा है कि सभी दल महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन का समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसके लिए सिद्धांत रूप से पार्टियों का रुख तय किया जा रहा है और उनके प्रमुख इसे सार्वजनिक कर रहे हैं.


कांग्रेस का रुख

कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिसीमन के प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मामला एक व्यापक ध्यान भटकाने की योजना का हिस्सा है। रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार कैसे कह सकती है कि परिसीमन के बाद उत्तर भारत के राज्यों का प्रभाव नहीं बढ़ेगा और दक्षिण के राज्यों का प्रभाव नहीं घटेगा? उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में केरल और उत्तर प्रदेश के बीच 60 सांसदों का अंतर है, जो परिसीमन के बाद 90 सांसदों का हो जाएगा। इसी तरह, हर उत्तर भारतीय राज्य में सीटें बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण में कम सीटें बढ़ेंगी। ध्यान देने योग्य है कि दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। इसलिए, कांग्रेस ने वहां की जनता को भी संबोधित किया है और अपने इरादे को स्पष्ट किया है.


समाजवादी पार्टी का विरोध

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनगणना कराए बिना परिसीमन कैसे कर सकती है। उनका मानना है कि परिसीमन 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर ही होना चाहिए। यदि परिसीमन नहीं होता है, तो महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिन का सत्र बुलाया है। इसी सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को नारी शक्ति वंदन कानून से अलग करने का प्रस्ताव लाया जाएगा। कहा जा रहा है कि सरकार अगले लोकसभा चुनाव और साथ ही होने वाले विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल से लेकर असम तक अपनी सभाओं में कहा है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने जा रही है। विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं करेगा, लेकिन परिसीमन का विरोध करेगा। सरकार चाहती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का काम हो और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएं, जिसमें से एक तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों। इसके लिए संविधान में संशोधन का विधेयक लाना होगा और इसे विशेष बहुमत से पास कराना होगा। विपक्ष के सहयोग के बिना यह संभव नहीं लगता।