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महिला आरक्षण कानून पर संसद में चर्चा: विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ

आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इस पर विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं, जहां कुछ दल समर्थन कर रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे एक साजिश करार दिया है। जानें इस विधेयक के पीछे की राजनीति और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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महिला आरक्षण कानून पर संसद में चर्चा: विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ

महिला आरक्षण कानून का प्रस्ताव

महिला आरक्षण कानून: आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इस पर विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं। कुछ दल इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे पिछड़े और दलित समुदाय की महिलाओं के खिलाफ एक साजिश मानते हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बिल पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "महिला आरक्षण बिल भाजपा और उनके सहयोगियों का एक नया धोखा है, जो दरअसल एक 'काला दस्तावेज़' है। यह एक गुप्त योजना है, जिसका उद्देश्य पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को हमेशा के लिए कमजोर करना है। यह उन्हें सच्चे जन प्रतिनिधित्व से वंचित रखने की साजिश है। यह बिल वर्चस्ववादियों की हार की हताशा का परिणाम है और नारी के प्रति उनके शोषणकारी दृष्टिकोण को दर्शाता है।"

उन्होंने आगे कहा, "जागरूक महिलाएँ इस बार भाजपा के बहकावे में नहीं आएंगी। यह बिल भाजपा की 'कुटिल राजनीति' का मुखौटा है। जैसे-जैसे भाजपा का विरोध बढ़ेगा, ऐसे और भी कई बिल आएंगे, जिनका उद्देश्य 'पीडीए' की एकजुटता को कमजोर करना है। भाजपा अपनी एक्सपायरी डेट के अंतिम महीनों में है।"

गौरतलब है कि मोदी सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें पहला विधेयक- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 है, जिसका उद्देश्य दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। दूसरा विधेयक- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 है, जो जनसंख्या की नई परिभाषा और संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। तीसरा विधेयक- परिसीमन विधेयक 2026 है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाना है।