महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव का सवाल: जनगणना जरूरी
महिला आरक्षण विधेयक पर उठे सवाल
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावित विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने से पहले नई जनगणना का होना आवश्यक है। यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि किसी भी नीति की नींव सही आंकड़ों पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण का ढांचा 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों पर आधारित है, तो यह स्वाभाविक रूप से गलत होगा।
उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का आधार ही कमजोर है। यदि आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक तिहाई है, तो इसका मतलब है कि यह गणित का विषय है, और गणित का आधार संख्याएं होती हैं। ऐसे मामलों में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना है।
यादव ने कहा कि ‘जब हम 2011 के पुराने आंकड़ों को आधार बनाएंगे, तो महिला आरक्षण की नींव ही गलत होगी। जब नींव में ही दोष होगा, तो सही परिणाम कैसे मिलेंगे? उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि पहले जनगणना कराई जाए, फिर महिला आरक्षण पर चर्चा की जाए।
जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा।
अगर किसी काम को करने की सही मंशा होती है, तो शंका नहीं होती है।
दरअसल महिला आरक्षण बिल का तो आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीटों का 1/3 (एक तिहाई) है तो इसका मतलब हुआ कि ये गणित का विषय है और गणित का आधार अंक होते हैं,… pic.twitter.com/3I8c7lfOnQ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 5, 2026
सपा के अध्यक्ष ने कहा कि जो सरकार महिलाओं की गिनती नहीं करना चाहती, वह उन्हें आरक्षण कैसे देगी? उन्होंने कहा कि भाजपा और उनके सहयोगी महिलाओं के साथ धोखा कर रहे हैं, और यह छलावा हम नहीं होने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक जनगणना नहीं होती, तब तक महिला आरक्षण पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।
यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन के लिए बढ़ा दिया गया है ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को 2029 से लागू किया जा सके। हाल ही में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा था कि सदन जल्द ही एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने के लिए फिर से बैठक करेगा। 2023 में पारित संविधान संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन विधेयक) के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन इसे परिसीमन की प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जा सकता है।
