महिला आरक्षण पर राजनीतिक नाटक: क्या भाजपा को मिलेगा लाभ?
महिला आरक्षण का मुद्दा और भाजपा की रणनीति
जनसंपर्क के क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले एडवर्ड एल बर्नेस का मानना था कि किसी नेता को यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में बच्चे का माथा चूमना है, तो उसके पास पहले से एक ठोस चाइल्ड केयर नीति होनी चाहिए। अन्यथा, यह केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगा। इसी सिद्धांत के आधार पर, यह स्पष्ट है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रयास का भाजपा को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे कोई ठोस योजना नहीं है।
यदि हम बर्नेस के विचार को लागू करें, तो प्रधानमंत्री मोदी को महिला आरक्षण के लिए एक ठोस आधार तैयार करना चाहिए था। संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल के बीच आयोजित हुआ, लेकिन इसकी जानकारी मार्च के अंत में ही मिली थी। इस दौरान यह भी स्पष्ट हो गया था कि सरकार महिला आरक्षण के लिए बिल लाने वाली है। यदि मोदी ने पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 100 सीटें महिलाओं को देने की पहल की होती, तो इसका प्रभाव अधिक होता।
हालांकि, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में केवल 32 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जो कुल सीटों का केवल 11 प्रतिशत है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब एक ओर महिला आरक्षण का बिल तैयार हो रहा था और दूसरी ओर भाजपा ने इतनी कम महिला उम्मीदवारों को उतारा। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा केवल दिखावे के लिए काम कर रही है।
महात्मा गांधी के अनुसार, 'मेरा जीवन ही मेरा उपदेश है'। यह सच है कि मतदाता, विशेषकर महिलाएं, नेताओं के कार्यों पर ध्यान देती हैं। यदि भाजपा अपने वादों के विपरीत कार्य कर रही है, तो यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिकेगी। ममता बनर्जी ने पिछले चुनावों में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिया है, जबकि भाजपा केवल बातें कर रही है।
इस बार महिला आरक्षण पर राजनीति अपने चरम पर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बताया कि पहले कितनी बार महिला आरक्षण विधेयक लाया गया और हर बार यह विफल रहा। लेकिन इस बार, राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रदर्शन और प्रचार हो रहे हैं। 18 अप्रैल की रात को बिल पर वोटिंग हुई, लेकिन इसे पास नहीं किया जा सका। इसके तुरंत बाद एनडीए की महिला सांसदों ने जुलूस निकाला।
भाजपा शासित राज्यों में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है ताकि विपक्ष की आलोचना की जा सके। यह सब इसलिए हो रहा है ताकि यह दिखाया जा सके कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। सवाल यह है कि क्या विपक्ष प्रधानमंत्री को 33 प्रतिशत महिला टिकट देने से रोक सकता है? प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे संकल्प लें कि यदि संशोधन पास नहीं होता है, तो भी वे महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करेंगे।
