महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: योगी और अखिलेश के बीच तीखी बहस
महिला आरक्षण बिल पर गरमाया राजनीतिक माहौल
नई दिल्ली: महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के संसद में पारित न होने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष पर आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मच गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।
योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर तीखा हमला
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पारित होता, तो महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन के कारण यह संभव नहीं हो सका।
उन्होंने कहा, "मैं सपा-कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाना चाहता हूं कि महिला आरक्षण का मुद्दा पुरुषों का हक नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का अधिकार है।"
द्रौपदी चीरहरण की तुलना
योगी ने संसद में हुई स्थिति की तुलना करते हुए कहा, "सदन में इंडी गठबंधन का दृश्य द्रौपदी के चीरहरण जैसा था।" उन्होंने कहा कि सभी आश्वासनों के बावजूद यदि सर्वसम्मति बनती, तो महिलाओं को उनका हक मिलता, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण प्रक्रिया को रोका गया।
संविधान और आरक्षण पर योगी का बयान
सीएम योगी ने कहा कि संविधान निर्माण के समय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग का विरोध किया गया था। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर और सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी इस विचार को खारिज किया गया था।
अखिलेश यादव का जवाब
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक पास न होना बीजेपी की नीतियों की हार है।
उन्होंने कहा, "बीजेपी 'CMF फॉर्मूला' पर काम कर रही है। Create, Mislead, Fear की राजनीति कर रही है। महिला आरक्षण के नाम पर असली मुद्दे छुपा रही है। यह विधेयक भाजपा की बदनीयत का काला दस्तावेज है।"
जल्दबाजी में लाया गया विधेयक
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन बिना सही प्रक्रिया के लाए गए विधेयक का विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए सही तैयारी जरूरी है।
जातीय जनगणना की मांग
अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना की मांग उठाते हुए कहा कि इससे आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे से बच रही है और मजबूत आरक्षण मांग से डर रही है।
