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महिला आरक्षण बिल का पारित न होना: टीएमसी की भूमिका पर सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पारित नहीं किया जा सका, जिसके पीछे टीएमसी की भूमिका को प्रमुखता से देखा जा रहा है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने टीएमसी के सदस्यों को धन्यवाद दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों का अपमान है। जानें इस मुद्दे पर और क्या प्रतिक्रियाएँ आई हैं।
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महिला आरक्षण बिल का पारित न होना: टीएमसी की भूमिका पर सवाल

महिला आरक्षण बिल का असफल होना

नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को पारित नहीं किया जा सका, क्योंकि इसे मंजूरी देने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं हुआ। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस विधेयक के असफल होने में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हुई, सभी दलों के नेता बाहर आए और कई प्रमुख नेताओं ने टीएमसी के सदस्यों को फोन कर धन्यवाद दिया। कांग्रेस के राहुल गांधी ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को फोन कर उनके प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अभिषेक को चुनाव में 20 से अधिक सांसद भेजने के लिए धन्यवाद दिया। इस बातचीत के दौरान अभिषेक ने राहुल को बताया कि देश में बीजेपी के खिलाफ एक लहर बन रही है।


अखिलेश यादव का ममता बनर्जी को फोन

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी को फोन किया। इसके अलावा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बेहतर समन्वय के लिए डेरेक ओ ब्रायन को धन्यवाद दिया। महिला आरक्षण विधेयक को पारित न होने में टीएमसी के नेताओं की भूमिका के लिए विभिन्न नेताओं ने उन्हें धन्यवाद दिया।


अमित शाह का विपक्ष पर हमला

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज लोकसभा में एक अजीब दृश्य देखने को मिला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक को कांग्रेस, टीएमसी, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस विधेयक को गिराना और इसका जश्न मनाना निंदनीय है। अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण नहीं मिल पाएगा, जो उनका अधिकार था। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया है, बल्कि बार-बार ऐसा किया है। उनकी यह सोच न केवल महिलाओं के हित में है, बल्कि देश के लिए भी हानिकारक है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि महिलाओं के अपमान का यह मामला यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि दूर तक जाएगा। विपक्ष को 'महिलाओं का आक्रोश' 2029 के लोकसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि हर स्तर पर झेलना पड़ेगा।