Newzfatafatlogo

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, सरकार को नहीं मिला बहुमत

महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिरा दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस बिल पर मतदान के दौरान 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विरोध में पड़े। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव को एक सुनियोजित जाल बताया, जिससे महिला आरक्षण 2029 से पहले लागू न हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 | 
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, सरकार को नहीं मिला बहुमत

महिला आरक्षण बिल पर मतदान

नई दिल्ली - लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह गिर गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस बिल पर विचार के दौरान मत विभाजन में 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विरोध में पड़े। उन्होंने कहा कि अब इस बिल पर आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है, क्योंकि यह विचार के लिए पेश किए जाने के स्तर पर ही गिर चुका है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अन्य दो बिलों को भी आगे न बढ़ाने की बात कही।


विपक्ष के विरोध के बावजूद, लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मतदान किया गया। इस संविधान संशोधन विधेयक पर ध्वनि मत से नहीं, बल्कि मत विभाजन के माध्यम से मतदान किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कितने वोट समर्थन या विरोध में पड़े हैं।


संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, विधेयक को सभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित सदस्यों के कम से कम दो तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए था, जो कि नहीं हुआ।


इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का प्रस्ताव एक सुनियोजित जाल है, ताकि महिला आरक्षण 2029 से पहले लागू न हो सके। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण 2029 से पहले होना चाहिए और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार के षड्यंत्र को सफल नहीं होने देंगे।


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है। इंडिया महागठबंधन द्वारा मुस्लिम आरक्षण की मांग को तुष्टिकरण की राजनीति के रूप में देखा गया है, जबकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।