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महिला आरक्षण विधेयकों के पीछे का असली मुद्दा परिसीमन: कांग्रेस का दावा

कांग्रेस ने संसद में पेश होने वाले महिला आरक्षण विधेयकों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। पार्टी का कहना है कि इन विधेयकों का असली उद्देश्य परिसीमन है, न कि महिला आरक्षण। जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं को साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे यह विधेयक कुछ राज्यों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किए गए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और कांग्रेस की मांगें।
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महिला आरक्षण विधेयकों के पीछे का असली मुद्दा परिसीमन: कांग्रेस का दावा

महिला आरक्षण कानून पर कांग्रेस की चिंताएं

भारत में परिसीमन विवाद: संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए तीन संशोधन विधेयक पेश किए जाने की योजना है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इन विधेयकों का असली उद्देश्य महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। पार्टी ने इस मुद्दे पर देशभर से गंभीर चिंताएं उठाई हैं।

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा, "लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं। इन्हें महिला आरक्षण के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनका असली मुद्दा परिसीमन है। परिसीमन के प्रस्तावों से कुछ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लाभ मिल रहा है, जहां भाजपा की स्थिति मजबूत है। इससे कई राज्यों की लोकसभा में शक्ति कम हो जाएगी। असम और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का तरीका दर्शाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी कितनी खतरनाक तरीके से काम कर रही है। इन विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय छल-कपट से भरा है, और इन्हें उनके वर्तमान स्वरूप में खारिज किया जाना चाहिए।"

रमेश ने आगे कहा, "विपक्ष की मांग स्पष्ट है: लोकसभा की 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाली महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। 2023 में भी विपक्ष का यही रुख था और आज भी यही है। यही असली सत्ता में भागीदारी है, जो लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है।"

गौरतलब है कि सरकार ने विशेष सत्र में लोकसभा में पेश किए जाने वाले तीन संशोधन विधेयकों की सूची जारी की है। इनमें पहला विधेयक- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 है, जिसका उद्देश्य दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। दूसरा विधेयक- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 है, जिसका लक्ष्य जनसंख्या की नई परिभाषा के तहत संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाना है। तीसरा विधेयक- परिसीमन विधेयक 2026 है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या को फिर से निर्धारित करना है।