Newzfatafatlogo

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की समीक्षा की, उत्तर प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की समीक्षा की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और जन शिकायतों के समाधान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो देश में सबसे बड़ा है, जो आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। प्रगति पोर्टल को शासन में सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है।
 | 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की समीक्षा की, उत्तर प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बना

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रगति पोर्टल (PRAGATI Portal) की समीक्षा की, जिसका पूरा नाम प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्पलीमेंटेशन है। इस बैठक में उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं, योजनाओं और जन शिकायतों के समाधान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'प्रगति' आज के नए भारत की कार्य संस्कृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो पर नजर डालें, तो इस अवधि में कुल ₹10 लाख 48 हजार करोड़ की लागत वाली 330 परियोजनाएं हैं, जिससे प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो देश में सबसे बड़ा है। प्रगति ने आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों के साथ-साथ सकारात्मक शासन को भी नई दिशा दी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस मॉडल को देखना वास्तव में एक गेम-चेंजर साबित हुआ है।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश अब भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बन चुका है। यहां पर बड़े पैमाने पर परियोजनाएं चल रही हैं, जो न केवल राज्य के विकास में बल्कि राष्ट्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रगति केवल एक समीक्षा तंत्र नहीं है, बल्कि यह शासन में सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की ओर अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है। प्रगति के जरिए 97 प्रतिशत समस्याओं के समाधान का लक्ष्य हासिल किया गया है। पीएम मोदी के विजन के अनुसार, हर योजना का लाभ आम जनता तक पहुंचाने में यह पहल मददगार साबित हो रही है। 2014 से पहले प्रोजेक्ट स्वीकृत होते थे, लेकिन पूरे नहीं होते थे। अब हर प्रोजेक्ट के आरंभ के साथ ही उसके पूरा होने का समय निर्धारित किया जाता है।